
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
मथुरा। मोर्चरी में 10 दिन तक लावारिस शव सड़ता रहा, लेकिन वृंदावन थाना पुलिस को इसकी याद ही नहीं आई। बाद में पोस्टमार्टम हाउस पर सेवाएं देने वाली संस्था ने जब जानकारी उच्चाधिकारियों को दी तो हलचल तेज हुई। सीसीटीवी खंगाले गए तो पता चला कि शव वृंदावन पुलिस द्वारा लाया गया था। एसएसपी श्लोक कुमार ने मामले की जांच एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह को सौंपी है। जिले के पोस्टमार्टम गृह का संचालन सेवार्थ संस्थान करती है। यहां संस्थान के प्रबंधक और कर्मचारी शाम तक रहते हैं। शाम पांच बजे के बाद पोस्टमार्टम गृह का ताला लगाकर घर चले जाते हैं। इसके बाद अगर कोई शव पुलिस लेकर आती है तो पास ही स्थित सिविल लाइन चौकी पर उपलब्ध दूसरी चाबी से मोर्चरी का ताला खुलवाकर शव रख दिया जाता है। इसके बाद अगले दिन संबंधित थाने से पुलिसकर्मी आकर शव की एंट्री रजिस्टर में कराता है। संस्था के प्रबंधक श्याम ठाकुर ने बताया कि 13 जून की शाम को रोज की तरह वह 5 बजे अपने घर चले गए थे। शाम 7 बजे के करीब एक वर्दीधारी करीब 60 वर्षीय वृद्ध का शव लेकर पहुंचा और उसे मोर्चरी में रखवाकर चला गया। इसके बाद न तो अगले दिन कोई रजिस्टर में एंट्री कराने के लिए पहुंचा और न ही कोई जानकारी दी। जानकारी होने पर उन्होंने शव फ्रीजर में रखवा दिया, लेकिन तब तक शव खराब हो चुका था। दिन बीतते गए, लेकिन किसी भी थाने से कोई नहीं पहुंचा। उन्होंने थानों से भी संपर्क किया, लेकिन सभी जगह से एक ही जवाब मिला कि उन्होंने कोई शव नहीं भेजा है। जब कहीं से जानकारी नहीं मिली तो श्याम ने मामले की जानकारी सिविल लाइन पुलिस चौकी के साथ ही कंट्रोल रूम को भी दी। साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के साथ साझा किए थे। फुटेज के माध्यम से पता चला कि शव वृंदावन थाने से होमगार्ड लेकर आया था। वृंदावन थाने से इसकी पुष्टि भी कर ली गई। अब मामला सामने आने के बाद वृंदावन पुलिस में खलबली मची हुई है। मामले में एसएसपी श्लोक कुमार ने नियमानुसार शव का पोस्टमार्टम करवाकर अंतिम संस्कार कराने के आदेश दिए हैं।
एसएसपी ने कहा, 10 दिन तक लावारिस शव का पोस्टमार्टम न कराया जाना लापरवाही है। मामले की जांच एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह को सौंपी है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



