मां विपत्तरनी पूजा की गाथा, किस तरह आरंभ हुआ मां विपत्तरनी की पूजा अर्चना
The story of Maa Vipattarni Puja, how the worship of Maa Vipattarni started

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
मां विपदतरुणी पूजा की शुरुआत उस समय हुआ जब एक राज्य में एक राजा अपने रानी के साथ खुशी-खुशी रहते थे। रानी की एक सहेली चमार जाति से आती थी, वह बराबर अपनी रानी सहेली के लिए उपहार स्वरूप कुछ ना कुछ लाती थी और रानी भी उपहार स्वरूप कुछ ना कुछ देती थी। एक दिन रानी को मांस देखने की इच्छा हुई, अब वह अपनी चमार सहेली से अपनी मन की बात सुनाई और कही आज मुझे मांस देखना है, सहेली भी इंकार न कर सकी और वह उपहार स्वरूप एक बर्तन में मांस ले आई यह बात सैनिक द्वारा राजा को पता चला तो वह आज बगुला हो गये और वह सीधे वहां पहुंच गये, जहां पर बर्तन में मांस रखा हुआ था। रानी भी परेशान हो गई और मां के शरण में चली गई और मां से यह विनती करने लगी की मां मुझे बचा लो, यदि राजा को पता चलेगा तो मेरे ऊपर सामत आ जायेगी, मां ने भी चमत्कार दिखाए और बर्तन में रखे मांस को तेरह फल फूल में तब्दील हो गई, जब राजा ने बर्तन में देखा तो वहां फल फूल दिखा, इस बात को लेकर सैनिक को काफी डांट- फटकार लगाई। रानी ने उस समय से ही मां विपद तरुणीमाता की पूजा अर्चना करने लगी और उस समय से मां विपद तरुणी की गाथा सुनाई पड़ने लगी और उस समय से हिंदू महिलाएं रीति रिवाज के साथ मां विपत्तारिणी की पूजा अर्चना करने लगी जो अब तक चली आ रही है।



