गोड्डा
सत्य विद्या का स्रोत वेद है जो ईश्वर प्रदत्त है : विद्यानिधि आर्य

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा (मेहरमा) : केवल वेद की विद्या ही सत्य विद्या है। इसके अलावा जितने भी मत और मतांतर हैं, उसमें सत्य और असत्य दोनों है। सत्य विद्या का स्रोत वेद है, जो ईश्वर ने दिया है। उक्त बातें आर्य समाज के वैदिक पुरोहित विद्यानिधि आर्य ने रविवार को आर्य समाज मंदिर चपरी में सार्वजनिक रूप से आयोजित साप्ताहिक वैदिक हवन यज्ञ के पश्चात प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जीवात्मा अल्पज्ञ होता है, इसलिए उसका ज्ञान कम होता है। रजो और तमो गुण के प्रभाव में आकर जीवात्मा असत्य को भी सत्य समझ लेता है। प्रकृति जड़ पदार्थ है, प्रकृति से बना जितना भी पदार्थ है, सभी जड़ है। जड़ की पूजा करने वाले की बुद्धि भी जड़ हो जाती है। जब तक मनुष्य ईश्वर की उपासना अर्थात ईश्वर के समीप नहीं बैठता है, तब तक उसे वास्तविक ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता।
उन्होंने बताया कि प्रकृति की उपासना का अलग तरीका है, उससे हमें लाभ लेना है, उसकी देखभाल करना है। प्रकृति हमारे लिए जीने का साधन है।कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक हैं। हम कहीं भी बैठकर ईश्वर का ध्यान कर सकते हैं। ईश्वर मनुष्य को हमेशा ज्ञान देते हैं। वे हमें हमेशा अच्छे कार्य के लिए प्रेरित करते हैं। उनके बताए रास्ते पर नहीं चलने से ही मनुष्य को दुख होता है। ईश्वर की उपासना के लिए मन की शुद्धि जरूरी है। सुख और दुख की अनुभूति मन से होती है। मन से ही हम परमात्मा की अनुभुति कर सकते हैं। मन शुद्ध नहीं होगा तो मनुष्य परमात्मा की प्रेरणा और ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। विद्यानिधि आर्य ने कहा कि जल से बाहर की शुद्धि तथा मन की शुद्धि विद्या और ज्ञान से होती है। वहीं ईश्वर के मुख्य नाम ओउम् की ध्वनि और शांति पाठ से कार्यक्रम का समापन किया गया। इस अवसर पर डाक्टर जवाहरलाल आर्य, धीरज कुमार आर्य, धनेश्वर प्रसाद, सुबोध कुमार आर्य, अनिल आनंद सहित अन्य उपस्थित थे।



