छिंदवाड़ा

भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता में कानून मे हुए बदलाव का तुलनात्मक चार्ट

पुलिस विभाग को सौंपने का कार्य ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा l

 नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो

छिंदवाड़ा :- भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के बीच मुख्य अंतर यह है l कि बीएनएस, आईपीसी की जगह लेती है l और इसका उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाना है। कुछ लोगों को बीएनएस की भाषा और प्रावधानों को समझने में कठिनाई हो रही है l खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में, जहां कानूनी जागरूकता कम है। इसके अतिरिक्त, बीएनएस में कुछ अपराधों की परिभाषा और सजाओं में बदलाव किए गए हैं, l जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
यहां कुछ विशिष्ट समस्याएं हैं ,जो सामने आ रही है l

 

भाषा और शब्दावली:
बीएनएस की भाषा आईपीसी की तुलना में अधिक आधुनिक और तकनीकी है l जिससे आम लोगों के लिए इसे समझना मुश्किल हो सकता है। कुछ कानूनी विशेषज्ञ भी बीएनएस में इस्तेमाल की गई कुछ शब्दावली पर सवाल उठा रहे हैं l उनका कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है या इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

अपराधों की परिभाषा और सजाएं:
बीएनएस में कुछ अपराधों की परिभाषा और सजाओं को बदल दिया गया है। उदाहरण के लिए “सामूहिक बलात्कार” की परिभाषा को बदल दिया गया है,और कुछ अपराधों के लिए सजाओं को बढ़ा दिया गया है। इन परिवर्तनों के कारण, कुछ लोगों को यह स्पष्ट नहीं है l कि कौन से कार्य अपराध हैं और उनके लिए क्या सजा हो सकती है।

प्रक्रियात्मक परिवर्तन:
बीएनएस के साथ, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 भी लागू किए गए lहैं। ये संहिताएं क्रमशः आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह लेती हैं। इन परिवर्तनों के कारण, पुलिस और अदालतों को नई प्रक्रियाओं और कानूनों के बारे में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।

संसाधनों की कमी:
बीएनएस को लागू करने के लिए, पुलिस और अदालतों को नई तकनीकों और प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। कई पुलिस स्टेशनों और अदालतों में अभी भी इन संसाधनों की कमी है l जिससे बीएनएस को प्रभावी ढंग से लागू करना मुश्किल हो सकता है।

जागरूकता की कमी:
कई लोगों को बीएनएस, बीएनएसएस और भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 के बारे में जानकारी नहीं है। इससे लोगों को यह समझने में कठिनाई हो सकती है l कि उनके अधिकार क्या हैं l और उन्हें कैसे लागू किया जा सकता है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए, सरकार को बीएनएस, बीएनएसएस और भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 के बारे में जागरूकता बढ़ाने, पुलिस और अदालतों को प्रशिक्षित करने, और इन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में आईपीसी के अधिकांश अपराधों को बरकरार रखा गया है। … भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 (बीएसबी) जो क्रमशः दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम मैं बदलाव किए गए हैं l जिसके कारण आम नागरिकों को कानून समझने में असुविधा हो रही है l इसी तारतम्य में भारतीय दंड संहिता को भारतीय न्याय संहिता में परिवर्तित किया गया l का शॉर्टकट विभिन्न धाराओं का उल्लेखित चार्ट को समझने में सुविधा की दृष्टि से तैयार किया गया है l जो ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन छिंदवाड़ा द्वारा पुलिस विभाग को चार्ट सौंपने का कार्य किया जा रहा है l इसी श्रृंखला में आज थाना देहात में जाकर भारतीय दण्ड संहिता और भारतीय न्याय संहिता में अंतर की जानकारी का तुलनात्मक शॉर्ट चार्ट थाना देहात के भारसाधक अधिकारी को ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन छिंदवाड़ा ने प्रदान किया जिसमें प्रमुख रूप से एडवोकेट देवेंद्र वर्मा एडवोकेट दोलत चौरे,व अहिल्याबाई कल्याण बोर्ड जिला छिंदवाड़ा ग्रामीण के अध्यक्ष जगदीश पाल उपस्थित रहे

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