अमरोहा
अमरोहा में दिखावे की सील, दूसरे रास्तों से चल रहे अवैध क्लीनिक व लैब

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमरोहा। जिले में अवैध रूप से अस्पताल, क्लीनिक और पैथोलॉजी चलाने वाले संचालकों की मनमानी स्वास्थ्य विभाग पर भारी पड़ रही है। सील अस्पताल और क्लीनिक में दूसरे रास्तों से चोरी छिपे मरीज देखे जा रहे हैं जबकि पैथोलॉजी लैब में जांच की जा रही है।
यह स्थिति जिले भर की है। इसे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से सांठगांठ कहा जाए या झोलाछापों की मनमानी कि इन पर लगाम नहीं लग पा रही है। सीएमओ ने झोलाछापों पर अंकुश लगाने के लिए ब्लॉक स्तर की सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक को जिम्मेदारी सौंपी है। बावजूद इसके अवैध क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब धड़ल्ले से चल रहे हैं। जिलेभर में अपंजीकृत अस्पताल का जाल फैला हुआ है। झोलाछाप मरीजों की नासमझी का फायदा उठा रहे है। इसका नतीजा यह होता है कि गलत इलाज से मरीजों को लेने के देने पड़ जाते हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसके गवाह हैं। जिले में सिर्फ 110 अस्पताल ही पंजीकृत हैं जबकि हर-गली मोहल्ले में और गांव-गांव पांच हजार से ज्यादा बिना पंजीकृत ही संचालित हो रहे हैं। बावजूद इसके झोलाछापों के क्लीनिक और अस्पतालों पर प्रशासन शिकंजा कसने में कामयाब नहीं हो रहा है। हर साल दर्जनों लोगों की मौत गलत उपचार के कारण हो रही है। झोलाछाप की लापरवाही से गर्भवती और नवजात की मौत हो जाती है। पिछले दिनों जोया में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। हॉस्पिटल संचालक सर्जन डॉक्टर होने का दावा कर रहा है जबकि हकीकत यह है कि वहां झोलाछाप ने ऑपरेशन किया था। यहीं वजह है कि नोडल अधिकारी के बुलाने पर हॉस्पिटल संचालक सर्जन डॉक्टरों को उनके सामने पेश नहीं किया गया।ऐसे कई मामले पहले सामने आ चुके हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की लचीली कार्रवाई के कारण अवैध क्लीनिक संचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। असलियत में सीएमओ कार्यालय में मौजूद जिम्मेदारों से हमसाज होकर अवैध क्लीनिक और अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है।कई बार विभाग के अधिकारी अवैध क्लीनिक व पैथोलॉजी लैब को सील भी करते हैं तो जिम्मेदारों की सांठगांठ से पीछे से रास्ते से इलाज शुरू कर दिया जाता है। ऐसे लोगों पर विभाग की ओर से न तो एफआईआर दर्ज कराई जाती है और न कड़ी कार्रवाई की जाती है।



