अमेठी
निरन्तर खाली हो रहा धरती का पेट – डॉ अर्जुन पाण्डेय

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। अमेठी जलबिरादरी की ओर से श्री शिव प्रताप इंटर कॉलेज के सभागार में भूगर्भ जल सप्ताह के अन्तर्गत ‘वर्षा जल संचयन एवं भूगर्भ जल स्तर’ विषयक संवाद संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती जी की पूजा अर्चना एवं माल्यार्पण से हुआ। विषय का प्रवर्तन करते हुए अध्यक्ष जलबिरादरी पर्यावरणविद् डॉ अर्जुन पाण्डेय ने कहा कि धरती पर तीब्र गति से बदलते मौसमी परिवेश एवं अत्यधिक जलदोहन से निरन्तर खाली हो रहा धरती का पेट चिंता का विषय है।आज के पांच दशक पूर्व जहां जनपद का औसत भूगर्भ जल स्तर 15 -20 फीट रहा अत्यधिक जलदोहन से जो आज घटकर औसत 35-40 फीट नीचे जा चुका है।स्थानीय जलस्रोत समदा,मसियांव,चंदवा,सभांवा, मैहार,बढ़ैला एवं बढ़नी आदि बड़े तालाब खाली पड़े हैं तथा सदानीरा मालती एवं उज्जयिनी नदियां बरसात के अलांवा सूख जाती हैं।अत्यधिक जलदोहन से भादर ब्लाक डार्क जोन बन चुका है।समय रहते सचेष्ट न हुए तो सम्पूर्ण जनपद को गम्भीर जल संकट से जूझना पड़ेगा। गम्भीर जल संकट से उबरने के लिए बरसात में होने वाली वर्षा के 20 प्रतिशत जल को संचयन द्वारा धरती का पेट भर के गिरते हुए भूगर्भ जल स्तर को उठाया जा सकता है।इसके लिए शासन- प्रशासन सहित स्थानीय जनमानस को आगे आने की जरूरत है। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य नवल किशोर सिंह ने कहा कि जल में ही जीवन है। जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त कोई भी कार्य जल के बिना नहीं होता है।पंच भौतिक तत्वों में जल का महत्व सर्वोपरि है।जल स्वराज से ही ग्राम स्वराज संभव है। मुख्य अतिथि वृक्ष मित्र टी पी सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि वृक्ष धरा के आभूषण है।विरवा पूत समान की भावना से पौधरोपण एवं उनका रखरखाव जरूरी है।जहां वृक्ष वहीं जल। धरती पर हरियाली बढ़े इसके लिए पीपल,बरगद, गूलर,पाकर एवं नीम आदि पंचवटी के वृक्ष श्रेयस्कर हैं।शासन- प्रशासन के बजाय ग्रामीण जनमानस वृक्षारोपण करे अन्यथा उनका रखरखाव कम फोटोग्राफी ज्यादा होगी।विशिष्ट अतिथि डॉ रमेश कुमार शुक्ल ने कहा कि वृक्ष नही तो हम नहीं।बाग गांव के शहर के नही।वीरान बनती जा रही पृथ्वी के लिए जल संचयन अपरिहार्य है।सत्येन्द्र प्रकाश शुक्ल ने कहा कि देवशयनी से लेकर देवोत्थानी एकादशी तक चौमासे में मांगलिक कार्य नही होते हैं। पुरानी कहावत रही चार महीना कमाय बारह महीना खाय।पुरानी पीढ़ी की तरह जल संचयन करके ही धरती का पेट भर सकते हैं। जगदम्बा तिवारी मधुर ने कहा कि वर्तमान में कोका कोला,रेलनीर प्लांट एवं सैकड़ों अनधिकृत वाटर प्लांट के अत्यधिक जलदोहन को रोक कर ही जनपद को पानीदार बनाया जा सकता है।संवाद गोष्ठी में प्रतीक्षा,साहिबा बानों,सुधा मोर्या, अनुष्का,नेहा,श्रेया आदि सैकड़ों की संख्या में छात्र- छात्राएं शामिल रहे।संवाद गोष्ठी का संचालन प्रकृति प्रेमी समीर मिश्र ने किया।


