
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और जनता को विषमुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए एक व्यापक और महत्वाकांक्षी प्राकृतिक खेती अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू होने वाला यह अभियान गांव-गांव तक पहुंचेगा, जिसका उद्देश्य गो-आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कम करना, और जनता को कैंसर, थायराइड, मधुमेह, बांझपन, और हार्मोनल असंतुलन जैसे रोगों से बचाना है। इस पहल में जीवामृत, घनजीवामृत, और वर्मीकम्पोस्ट जैसे प्राकृतिक उर्वरकों को रासायनिक विकल्पों के रूप में स्थापित किया जाएगा, जिससे मिट्टी की उर्वरता और फसलों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

अभियान की प्रमुख विशेषताएं:
1. किसानों की आर्थिक सशक्तिकरण:
सरकार का लक्ष्य प्रत्येक किसान को प्रति एकड़ 10,000 से 12,000 रुपये की बचत दिलाना है। प्राकृतिक खेती के तरीकों, जैसे जीवामृत और वर्मीकम्पोस्ट, के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
ग्राम ऊर्जा मॉडल के तहत बायोगैस यूनिट्स की स्थापना से ग्रामीण परिवारों की एलपीजी खपत में 70% तक की कमी आएगी, जिससे उनकी ऊर्जा लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
विषमुक्त खाद्य पदार्थों की उपलब्धता:
2. इस अभियान के तहत अन्न, दूध, फल, और सब्जियों को रासायनिक मुक्त करने पर जोर दिया जाएगा। जीवामृत, घनजीवामृत, और वर्मीकम्पोस्ट के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को स्वस्थ और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
यह पहल कैंसर, थायराइड, मधुमेह, और हार्मोनल असंतुलन जैसी बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे जन स्वास्थ्य में सुधार होगा।
गो-आधारित खेती और बायोगैस संयंत्र:
3. योगी सरकार ने प्रदेश भर में 43 गोशालाओं में बायोगैस और जैविक खाद संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है। मिर्जापुर के हलिया क्षेत्र में 27 बीघा जमीन पर बन रहा पहला गो-अभयारण्य इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
बायोगैस यूनिट्स ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ और किफायती ऊर्जा प्रदान करेंगी, जिससे उनकी बाहरी ईंधन पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता:
4. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित किया जाएगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
यह अभियान जैव विविधता को बढ़ावा देगा और रासायनिक प्रदूषण को कम करके पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देगा।
किसानों के लिए प्रशिक्षण और सहायता:
5. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं। 2020 में गंगा नदी के किनारे 27 जिलों में 730 किसानों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया था।
प्रत्येक रबी और खरीफ सीजन में 838 सरकारी कृषि बीज डिपो पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें 50,000 से अधिक किसानों को लाभ होगा।
जैव उर्वरकों पर 75% सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिससे 90,000 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
कार्य योजना और भविष्य की दिशा:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान को प्रत्येक गांव तक पहुंचाया जाए। इसके लिए कृषि विभाग, चंद्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, और अन्य संस्थानों की टीमें गठित की गई हैं, जो किसानों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करेंगी। यह अभियान 12 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें 50 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है।
प्रशिक्षण और जागरूकता: प्रत्येक ब्लॉक में प्राकृतिक खेती के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिसमें वैज्ञानिक और विशेषज्ञ किसानों को जैव उर्वरकों और गो-आधारित खेती की तकनीकों से अवगत कराएंगे।
सब्सिडी और सहायता:
जैव उर्वरकों और बायोगैस यूनिट्स की स्थापना पर 75% तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
मॉनिटरिंग और मूल्यांकन:
अभियान की प्रगति की निगरानी के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से किसानों की भागीदारी और परिणामों का आकलन किया जाएगा।
योगी सरकार का यह प्राकृतिक खेती अभियान उत्तर प्रदेश को कृषि, पर्यावरण, और जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह पहल न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि विषमुक्त खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करके जन स्वास्थ्य को बढ़ावा देगी। गो-आधारित खेती और बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने वाला यह मॉडल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर, समृद्ध, और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।



