अलवरक्राइम

युवक का सुसाइड, जूली बोले-अब तक थाना सस्पेंड हो जाता

 नेताओं के सामने रोई मृतक की दादी और ताई, बोली- पुलिस दबाव बनाने में लगी

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
अलवर : 11 दिन पहले पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर 22 साल के लड़के ने सुसाइड कर लिया था। सुसाइड नोट में 3 पुलिसकर्मियों सहित कुल 6 लोगों के नाम लिखे हैं। दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने से परिजनों में आक्रोश है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली आज मृतक युवक के घर पहुंचे। उनके सामने मृतक की दादी और ताई बिलखने लगी।
बोली- ‘उनका बेटा चला गया। और पुलिस दबाव बनाने में लगी है। बार-बार थाने में बुलाते हैं। हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रहा। थाना प्रभारी रमेश सैनी बार-बार दबाव बनाने में लगा है। सुसाइड नोट के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।’
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने परिजनों को ढांढ़स बंधाया। जूली बोले- मामले पर सरकार कोई जवाब नहीं देना चाह रही। अब तक तो थाना सस्पेंड हो जाना चाहिए था।
चोरी के मामले में पकड़ा था
दरअसल, 7 जुलाई को युवक अमित सैनी और उसके दोस्त को चोरी के आरोप में पुलिस पकड़कर लेकर गई थी। पुलिसकर्मियों ने लॉकअप में रातभर मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी थी। परिजनों ने वकील की मदद से उसे थाने से छुड़वाया लेकिन उसका मोबाइल, पर्स, बाइक पुलिस और अन्य लोगों के पास ही रह गए। इस प्रताड़ना के बाद युवक ने जहर खाकर सुसाइड कर लिया था।
मंत्री बोले- पुलिस ने दोषियों पर फिर तक दर्ज नहीं की :
मामले को लेकर कांग्रेस ने भी धरना दिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली आज मृतक के घर भी पहुंचे। दोनों नेताओं के सामने परिजन रोने लगे। हाथ जोड़कर न्याय की मांग की। परिजनों से मिलने के बाद पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह ने सुसाइड नोट दिखाते हुए कहा- बड़ी दुख की बात है।
अमित सैनी को पुलिस ने डराया-धमकाया और मारपीट की। सुसाइड नोट में नाम तक लिखे हैं। अमित पर झूठ बुलवाने के लिए दबाव डाला। पुलिस ने दोषियों पर फिर तक दर्ज नहीं की। इस मामले में लोकसभा और विधानसभा में उठाया जाएगा
पूर्व मंत्री ने कहा- मृतक के नाबालिग दोस्त को भी बालिग बनाकर अरेस्ट कर लिया। इस मामले में भी जांच कराएंगे। इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।
मामले में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- कुछ दिन पहले सदर थाने का एसएचओ उनसे मिला था लेकिन किसी दूसरे विषय पर बात हुई थी। इस मामले को विधानसभा में उठाएंगे। तब सरकार को जवाब देना पड़ेगा।
इतना बड़ा केस हो गया। नाबालिग को बंद किया। फिर सुसाइड हो गया। निर्वस्त्र कर पीटा गया। तब भी सरकार कोई जवाब नहीं देना चाह रही। हम संविधान बचाने की बात करते हैं। अब तक थाना सस्पेंड हो जाना चाहिए। जिन पर आरोप है वे खुद ही थाने में बैठे है। ऐसे में क्या जांच करेंगे।
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