बालाघाट
न्यायालय का आदेश लेकर ग्राम प्रधान पहुंचे कलेक्टर की जनसुनवाई में
पंचायत की आबादी भूमि पर अतिक्रमणकारियो द्वारा किराये पर देकर संचालित हैं शराब दुकान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) । औद्योगिक नगरी ग्राम गर्रा में पंचायत की आबादी भूमि पर शराब दुकान संचलित होने के मामले को लेकर ग्राम पंचायत गर्रा के द्वारा 3 वर्ष पूर्व से लगातार प्रशासन के समक्ष याचिका लगाई जा रही थी पर सुनवाई न होने पर लेनी पड़ी उच्च न्यायालय की शरण संचलित दुकान एवं असामाजिक तत्वों से आबादी भूमि खाली कर पंचायत की भूमि ग्राम पंचायत को जनहित हेतु सौंपी जाये।
प्राप्त जानकारी अनुसार शराब ठेकेदार ने गाेयल परिवार से संतोषी स्वरूपलाल गाेयल से अनुबंध स्वरूप किराये में ले रखी हैं। ग्राम पंचायत का कहना हैं कि उक्त भूमि आबादी खसरा नं. 419 की हैं, तथा उसी के बाजू में एक अपराधिक प्रवृत्ति के सजायाप्ता व्यक्ति ने भव्य भवन तैयार किया हुआ हैं तथा अपना मालिकाना अधिकार बताता आ रहा हैं। उक्त भूमि को भी ग्राम पंचायत शासकीय भूमि बता रही हैं। पूरे मामले को लेकर उच्च न्यायालय जबलपुर में बालाघाट जिला प्रशासन को सरपंच द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की सत्यापित प्रति एवं ज्ञापन दिये जाने से 90 दिन के अंदर न्याय संगत कार्यवाही करते हुए ग्राम प्रधान गर्रा को अवगत कराने के लिए कहा हैं। बीते कल ग्राम प्रधान वैभवसिंह बिसेन तथा समस्त पंचगण मामले को लेकर कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे, वैभवसिंह बिसेन ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि हमारे द्वारा जिला प्रशासन को न्यायालय का आदेश की सत्य प्रतिलिपि एवं ज्ञापन दे दिया गया हैं और आज दिनांक से 90 दिवस के भीतर मतलब 30 अक्टूबर 2025 के पूर्व माननीय कलेक्टर महोदय द्वारा ग्राम पंचायत गर्रा द्वारा आज दिनांक तक जनता के हित में पारित प्रस्तावों के आधार पर आबादी भूमि में किए गए अतिक्रमणों के संबंध में कार्यवाही किया जाना हैं।प्राप्त जानकारी अनुसार गाेयल दम्पत्ति शासकीय सेवा में थे, अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वारासिवनी रोड़ पर संचलित शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने को लेकर लगभग एक सैकड़ा ग्रामीणजन एंव समस्त पंचगण्ा और सरपंच गाेयल परिवार से उच्च न्यायालय के पूर्व निवेदन करने गया था कि आप उक्त शराब दुकान का अवैध संचालन बंद करावें और ग्राम हित में अपना सहयोग प्रदान करें परन्तु उल्टा गाेयल दम्पत्ति द्वारा 2 लाख रूपये की मांग सभी के समक्ष की गई थी, जिसका वीडियों भी वायरल हुआ।
ज्ञात हो कि उक्त गाेयल दम्पत्ति को उनके पड़ोसी एवं आबादी के भूमि के अतिक्रमणकारी सजायाप्ता व्यक्ति का समर्थन प्राप्त होता हैं। इस वजह से उन लोगों के हौंसले अतिक्रमणकारी होते हुए भी बुलंद हैं। ज्ञात हो कि 15 अगस्त 2022 से लेकर उच्च न्यायालय के शरण मेें जाने के पूर्व तक ग्राम पंचायत द्वारा विधिसम्मत तरीके से 5 बार प्रस्तावित कर राज्य शासन, जिला प्रशासन एवं संबंधित समस्त अधिकारीगणों को अतिक्रमकारियों एवं शराब दुकान को आबादी भूमि में न चलाये जाए। इसकी शिकायत की जा चुकी थी, परन्तु जब बार-बार शिकायत होने पर भ्ाी संज्ञान नहीं लिया गया, तब 24 जनवरी 2025 को ग्राम के समस्त जनता एंव पंचगणों के द्वारा प्रस्ताव पारित कर उच्च न्यायालय की शरण में जाने का निर्णय लिया गया न्यायालयीन याचिका के पूर्व 27 फरवरी 2025 को पूर्व में की गई समस्त शिकायतों एवं पारित प्रस्तावों को संलग्न करते हुए माननीय कलेक्टर बालाघाट को अंतिम बार आवेदन दिया गया था और उक्त्ा आवेदन में सुनवाई न होने पर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में रीट पीठीसन क्रमांक 24516/2025 दायर की गई और उसमें पूर्व में चले केसो का हवाला देते हुए बताया गया कि माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा आदेशित रीट पीठीसन क्रमांक 7865/2021 ग्राम पंचायत धुमा विरूद्ध मध्यप्रदेश सरकार एवं रीट पीठीसन क्रमांक 8517/2021 राघवेन्द्र प्रताप सिंह विरूद्ध मध्यप्रदेश सरकार इन दोनो पीठीसनो को सम्मिलित करते हुए दिए गए आदेश दिनांक 09/06/2021 में चीफ जस्टिस द्वारा स्पष्ट किया गया हैं कि हर जिले में अतिक्रमणों को रोकने के लिए PLPC (पब्लिक लेंड प्रोटेक्सन सेल) का गठन हो और जिसके अध्यक्ष जिले के कलेक्टर रहेंगे और तहसीलदार उसके मेंबर सेक्रेटरी होंगे और उक्त PLPC का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे अतिक्रमणों मेें कठोरतम अंकुश लगाना होगा। उक्त ग्राम पंचायत गर्रा द्वारा लगाई गई रीट पीठीसन 24516/2025 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश किया गया हैं कि सरपंच ग्राम पंचायत गर्रा द्वारा की गई 27/02/2025 की शिकायत को आज दिनांक से लेकर 90 दिवस के अंदर निराकृत कर ग्राम पंचायत को विधिवत सूचित करें।
इनका कहना है:-
सौंपा गया ज्ञापन न्याय संगत एवं ग्रामहित में हैं जिसमें पूर्व से ही और भविष्य में भी होने वाली कानूनन प्रकि्रयाओं में हम ग्राम पंचायत सरपंच के साथ हैं, प्रशासन पारदर्शी कार्यवाही करें।
वार्डपंच श्रीमती रीना भालाधरे, संतोष डहरवाल, श्रीमती जुबेदा शाह, सुरेन्द्र यादव, महेन्द्र परिहार, श्रीमती ठाकरे, सोमेश्वर ठाकरे, महेश केकतीकर, राजू पांचे(उपसरपंच)
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेशित समयावधि 30 अक्टूबर 2025 को पूर्ण हो रही हैं, हमारे द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में अगर प्रशासन नियमानुसार कार्यवाही कर अतिक्रमणकारियों एवं अवैध संचालित मदिरा दुकान को नहीं हटाता हैं तो 91 वे दिन हम कंटेम्पट पीठीसन में पुन: माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेेंगे या माननीय सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली की शरण लेंगे जिसमें सम्पूर्ण ग्राम पंचायत की जनता एवं समस्त पंचगण हमारे साथ हैं।
वैभवसिंह बिसेन
ग्राम पंचायत सरपंच गर्रा



