कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई द्वारा विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को बदलने की मांग।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम : भारत-अमेरिका संबंधों और देश की विदेश नीति को लेकर लोकसभा के उपनेता तथा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मीडिया के सामने अपना बयान रखा और कहा – “पिछले दो दिन से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर जो बयान दिए गए हैं, वे देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। मैं महसूस करता हूँ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को अपने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल को जल्द से जल्द बदल देना चाहिए। क्योंकि इन्हीं दोनों के सलाह पर प्रधानमंत्री विदेश नीति के फैसले लेते हैं, और आज उसका परिणाम हम सबके सामने है।” “अभी अमेरिका ने भारत पर 25% शुल्क लगाया है, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन उससे भी अधिक चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में राष्ट्रपति ट्रंप और पाकिस्तान सरकार के बीच जो मधुर संबंध और बातचीत हो रही है। ट्रंप ने कहा, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच एक समझौता होने वाला है, जिसके तहत दोनों देश मिलकर विशाल तेल भंडार विकसित करेंगे। ऐसा दिन भी आ सकता है कि भविष्य में भारत को पाकिस्तान से खनिज तेल खरीदना पड़े। यह भारत और अमेरिका के संबंधों में गिरावट का चिंताजनक संकेत है, जो हम देख रहे हैं।” “हम एक चिंताजनक स्थिति में पहुँच गए हैं। इसी कारण मैंने विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को बदलने की मांग की है।” “इस साल की शुरुआत में फरवरी महीने में प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री ने अमेरिका की यात्रा की थी और उसका खूब प्रचार हुआ था। लेकिन आज की स्थिति को देखकर कहा जा सकता है कि वह यात्रा पूरी तरह से विफल रही। एक तरफ अमेरिका हम पर 25% शुल्क लगा रहा है, दिन-प्रतिदिन पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ बना रहा है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर को विशेष आतिथ्य दिया गया।” “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत विदेश नीति को प्रधानमंत्री मोदी ने जयशंकर और डोभाल की सलाह के चलते कमजोर और लाचार बना दिया है। हालत यह हो गई है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी किसी देश ने पाकिस्तान को खुले तौर पर दोषी नहीं ठहराया था। इसके अलावा गौरव गोगोई ने कहा कि, बार-बार हमने सरकार की विदेश नीति और विदेश मंत्री की विफलता के उदाहरण देखे हैं।”



