16 दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान के 12वें दिन विधिपूर्वक शांतिनाथ भगवान की पूजा-अर्चना,
सौ धर्म इंद्र बनने का सौभाग्य अजय जैन और बिजेंद्र जैन को प्राप्त

आज के विशेष विधान में सौ धर्म इंद्र बनने का सौभाग्य नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी अजय जैन (मसाले वाले) एवं बिजेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। दोनों ने पारंपरिक धार्मिक वेशभूषा धारण कर विधिवत पूजा कराई और प्रभु की आराधना में सहभागी बने।
आचार्य श्री 108 नयन सागर जी मुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा:
“भगवान शांतिनाथ की पूजा यदि जिनालय में, जिनेंद्र भगवान के समक्ष की जाए, तो वह अनंत गुना फलदायक होती है। जबकि गृहस्थ जीवन विषय-कषायों से युक्त होने के कारण, घर पर की गई मंत्र साधना अपेक्षाकृत सीमित फल देती है।”
उन्होंने आगे कहा कि नूतन गृह या व्यापार स्थल पर जब शांति विधान कराया जाता है, तो वहां पवित्रता व स्थान की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है।
“अशुद्ध वातावरण में की गई मंत्र साधना न स्वयं के लिए और न ही अन्य जीवों के लिए कल्याणकारी होती है।”
धर्मसभा में नगर के कई प्रमुख श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से भाग लेने वालों में प्रवीण जैन, मनोज जैन, संभव आनंद जैन, पवन जैन, सोनू जैन, अनुराग मोहन, सुरेंद्र मलानिया, राकेश जैन, अंकुर जैन आदि श्रद्धालु सम्मिलित हुए और पूजा-अर्चना में भाग लिया।
पूरे दिन विधान की विभिन्न क्रियाएं मंत्रोच्चार, अभिषेक, शांतिधारा और आरती के माध्यम से अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ सम्पन्न की गईं। अतिथि भवन का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक, सात्विक और भक्तिमय बना रहा।
यह महामंडल विधान आगामी चार दिनों तक निरंतर जारी रहेगा। समापन दिवस पर महाआरती, शांतिधारा और पूर्णाहुति का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें नगर व आसपास के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की जाती है।




