यूपी विधानसभा में जल जीवन मिशन पर तीखी बहस,
मंत्री और विधायक के बीच "बीवी की कसम" और इस्तीफे की नोकझोंक

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन जल जीवन मिशन को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक मोहम्मद फहीम इरफान ने योजना के तहत अपने क्षेत्र में पानी की आपूर्ति न होने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने चुनौती भरे लहजे में कहा, “बीवी की कसम खाओ कि आपके गांव में पानी नहीं पहुंचा, वरना मैं इस्तीफा दे दूंगा।” इस बयान ने सदन में हल्का माहौल बनाया, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी आलोचना भी हुई।
बहस का केंद्र: जल जीवन मिशन
मॉनसून सत्र के दौरान सपा विधायक फहीम इरफान ने जल जीवन मिशन की प्रगति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति अभी भी नहीं हो रही है। उन्होंने योजना में भ्रष्टाचार और खामियों का आरोप लगाया। जवाब में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दावा किया कि राज्य में 80% से अधिक ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है। उन्होंने फहीम से अपने गांव का नाम बताने और कसम खाने की चुनौती दी, जिस पर फहीम ने पलटवार करते हुए कहा, “मैं कसम नहीं खाऊंगा, लेकिन आप पश्चिमी यूपी के किसी भी जिले की जांच कर लें। अगर वहां पानी पहुंचा हुआ मिला, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।”
सदन में हल्का माहौल, बाहर आलोचना
मंत्री और विधायक के बीच इस नोकझोंक ने सदन में मौजूद विधायकों के बीच हंसी-मजाक का माहौल पैदा किया। हालांकि, सोशल मीडिया पर स्वतंत्र देव सिंह के “बीवी की कसम” वाले बयान की आलोचना हुई। कई यूजर्स ने इसे असंसदीय और गैरजिम्मेदाराना करार दिया, जबकि कुछ ने इसे यूपी की देसी राजनीति का हिस्सा बताया। विपक्ष ने भी इस बयान को गंभीर मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया।
जल जीवन मिशन की स्थिति
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका लक्ष्य हर ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। यूपी सरकार का दावा है कि प्रदेश में इस योजना के तहत लाखों घरों तक पानी पहुंचाया जा चुका है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई जगहों पर पानी की किल्लत बरकरार है। इस बहस ने योजना के कार्यान्वयन और उसकी चुनौतियों को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।



