धनबाद

धनबाद में भू- धंसान की त्रासदी, धरती फटी और पाताल में समा गये लोग, पुनर्वास के इंतजार में मौत से जंग लड़ रहीं बची जिंदगियां

Land subsidence tragedy in Dhanbad, the earth cracked and people got buried in the ground, the surviving lives are fighting for life while waiting for rehabilitation

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
धनबाद। भारत की कोयला राजधानी धनबाद आज भू-धंसान की त्रासदी से जूझ रहा है. दशकों से चली आ रही इस समस्या ने न केवल लोगों की जिंदगियों को खतरे में डाला है, बल्कि उनके घरों, सपनों और भविष्य को भी पाताल में समा दिया है. अवैध कोयला खनन, भूमिगत आग और भारी बारिश ने कोयलांचल को एक ऐसी धरती बना दिया है, जहां हर पल मौत का डर सताता है। धनबाद में 17 और 18 अगस्त की दरमियानी रात जब घर में बच्चे सो रहे थे, तभी जोरदार आवाज हुई और धीरे-धीरे घर जमीन में समा गया. गनीमत रही कि तेज आवाज से घर में सो रहे लोग जाग गए और कड़ी मशक्कत के बाद अपनी जान बचा सके। घटना जोगता थाना क्षेत्र के हटिया के पास सात नंबर की है. भू धंसान के कारण दूर तक धरती फट गई है. जिसमें बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं. एक घर पूरा का पूरा जमीन में समा गया। वही, आसपास के भी कई घर प्रभावित हुए हैं। घटना के बाद लोगों में दहशत का माहौल है। ये सिर्फ धनबाद के जोगता थाना इलाके के लोगों का ही दर्द नहीं है. धनबाद में हर साल ऐसे 5 से लेकर 20 मामले तक आते हैं.
पिछले पांच वर्षों (2020-2025) की बात करें तो अनुमानित 100-150 भू-धंसान की घटनाओं ने 10-20 लोगों को घायल किया और 3-5 लोगों की जान ली। इस मामले में खास बात ये भी है कि भू धंसान का कोई भी आधिकारिक आंकड़ा कहीं भी दर्ज नहीं किया जा रहा है। स्थानीय लोग भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और प्रशासन से पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन आश्वासनों के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव बना हुआ है। भू-धंसान: कोयलांचल की दशकों पुरानी त्रासदी। धनबाद का कोयलांचल क्षेत्र, जो भारत का कोयला उत्पादन का प्रमुख केंद्र है, पिछले 150 वर्षों से कोयला खनन के लिए जाना जाता है। लेकिन इस खनन ने जमीन के नीचे खाली सुरंगें और भूमिगत आग छोड़ दी, जो भू-धंसान की घटनाओं का प्रमुख कारण बन गईं. इन घटनाओं ने न केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि कई जिंदगियां भी छीन लीं. कुछ मामलों में, लोग जमीन के अंदर समा गए और उनके शव तक बरामद नहीं हो सके. परिजनों को न तो उनके प्रियजनों का अंतिम दर्शन मिला और न ही अंतिम संस्कार का अवसर। केस स्टडी 1: 15 अगस्त 2023 की रात, जब पूरा देश आजादी का जश्न मनाने की तैयारी में था, जोगता थाना क्षेत्र में एक भयावह भू-धंसान की घटना ने श्याम सुंदर भुइयां के परिवार को झकझोर दिया. रात करीब 2:00 से 2:30 बजे जोरदार आवाज के साथ जमीन फटी, और श्याम सुंदर का मकान उनके बेटों अरुण और तरुण के साथ जमीन के अंदर समा गया। अरुण ने बताया कि रात 2 बजे अचानक धरती फटी, और हमारा घर उसके अंदर चला गया. मैं मेरे पिता श्याम सुंदर भुइयां, और छोटा भाई तरुण उसमें थे। चाचा राम बहादुर भुइयां और आसपास के लोगों ने छप्पर हटाकर हमें बाहर निकाला, जिससे हमारी जान बची। इस घटना के बाद बीसीसीएल ने पुनर्वास का आश्वासन दिया, लेकिन दो साल बाद भी परिवार उसी खतरनाक क्षेत्र में रहने को मजबूर है। स्थानीय निवासी रामस्वरूप प्रसाद ने कहा कि यहां करीब 125 घर हैं। बीसीसीएल ने पुनर्वास का वादा किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हर बारिश में जान का डर बना रहता है। राम बहादुर भुइयां ने भी बताया कि वे बेलगड़िया या धोकरा में शिफ्ट होने को तैयार हैं, लेकिन उदासीनता के कारण यह संभव नहीं हो रहा। केस स्टडी 2: न्यू धौड़ा, 27 सितंबर 1995: हालांकि यह घटना 2020-2025 के दायरे से बाहर है, लेकिन यह कोयलांचल में भू-धंसान की भयावहता को दर्शाती है. 27 सितंबर 1995 को केंदुआ से झरिया जाने वाली सड़क के किनारे न्यू धौड़ा में धरती फटी, और सुरेश प्रसाद और उनकी पत्नी नीलम देवी का एक कमरा जमीन के अंदर समा गया. दोनों दंपति उस रात सो रहे थे और हमेशा के लिए काल के गाल में समा गये। मृतक के भाई श्याम सुंदर चौरसिया ने बताया कि उस रात भारी बारिश हो रही थी. मेरी बेटी को टॉयलेट के लिए उठाया था, और उसे दूसरे कमरे में सुलाया. उसी दौरान धरती फटी, और भैया-भाभी जमीन में समा गए. भाभी की चीख सुनाई दी, लेकिन भैया उसे बचाने गए और दोनों गायब हो गये। बीसीसीएल ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन शव बरामद नहीं हुए। दोनों की समाधि घटनास्थल पर बनाई गई, जहां हर साल 27 सितंबर को लोग श्रद्धांजलि देते हैं। सरकार ने कुछ मुआवजा दिया, लेकिन परिवार आज भी उस दर्द को भूल नहीं पाया। केस स्टडी 3: झरिया, 24 मई 2017: 24 मई 2017 को झरिया के इंदिरा चौक पर सड़क किनारे धरती फटी और बबलू खान और उनके 8 वर्षीय बेटे रहीम खान पाताल में समा गए. सुबह 7 बजे बबलू अपने गैरेज में चाय पीने के लिए बेटे को बुलाने गए थे, तभी यह हादसा हुआ. मृतक के भाई मो. अशरफ खान ने बताया, *“लोगों की भीड़ जमा हुई, बीसीसीएल और एनडीआरएफ की टीमें आईं, लेकिन दोनों के शव नहीं मिले। स्थानीय निवासी रवि सिंह ने कहा कि घटना के बाद मुआवजा तो मिला, लेकिन आसपास के सैकड़ों लोग अब भी खतरे में रह रहे हैं. बीसीसीएल का पुनर्वास नीति अपर्याप्त है. बेलगड़िया में दिए जाने वाले घर छोटे हैं, जो बड़े परिवारों के लिए उपयुक्त नहीं। उन्होंने बीसीसीएल और केन्द्र सरकार को भविष्य के हादसों की जिम्मेदारी लेने की चेतावनी दी. ऐसे ही स्टोरी के लिए नेशनल प्रेस टाइम्स दैनिक अखबार से जुड़े रहे। जोगता, झरिया और गोविंदपुर के निवासियों ने बीसीसीएल से सुरक्षित पुनर्वास की मांग की है. बेलगड़िया टाउनशिप में छोटे आवासों के कारण लोग वहां जाने से हिचक रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने मकानों, आजीविका और अन्य नुकसानों के लिए उचित मुआवजे की मांग की है।
पुनर्वास के साथ-साथ स्थानीय लोग रोजगार के अवसरों की मांग कर रहे हैं, क्योंकि खनन क्षेत्रों में काम बंद होने से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बारिश के मौसम में हर पल खतरे में जीना पड़ता है, और प्रशासन की उदासीनता ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। धनबाद के डीसी आदित्य रंजन ने बताया कि भारत सरकार ने नई पुनर्वास नीति( जे एम पी 2.0) लागू की है, जिसमें आवास का आकार 39 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 50-60 वर्ग मीटर किया गया है। मुआवजे की राशि भी बढ़ाई गई है। वही निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि विस्थापन आयोग का गठन जल्द होगा, जिससे प्रभावित परिवारों को लाभ मिलेगा। 2009 में 70-80 हजार प्रभावित परिवारों की पहचान की गई थी, जो 2021-22 के सर्वे में बढ़कर 1.2 लाख हो गई। जे एम पी 3.0 की संभावना भी जताई जा रही है। डीसी ने बताया कि 80-90 करोड़ रुपये के बजट के साथ स्किल डेवलपमेंट और माइक्रो-इंडस्ट्री के लिए 25 एकड़ में प्रोजेक्ट शुरू होगा। वही इस मामले में निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि “कोयलांचल में भू-धंसान की स्थिति भयावह है। प्रभावित परिवारों को तत्काल पुनर्वास की जरूरत है। बीसीसीएल को बेलगड़िया और धोकरा में शिफ्टिंग तेज करनी चाहिए। बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो कहते हैं “जोगता श्याम बाजार में स्थिति गंभीर है. बीसीसीएल को खतरनाक क्षेत्रों से लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर बसाना चाहिए”। धनबाद का कोयलांचल भू-धंसान की त्रासदी से जूझ रहा है, जो दशकों पुरानी खनन गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। जोगता, झरिया और केंदुआ जैसे क्षेत्रों में लोग हर पल डर के साये में जी रहे हैं. बीसीसीएल और प्रशासन ने नई पुनर्वास नीति और विस्थापन आयोग की बात की है, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ा रहा है। कोयलांचल को इस त्रासदी से मुक्त करने के लिए अवैध खनन पर रोक, भूमिगत आग का समाधान, और तेज पुनर्वास जरूरी है। यदि ये कदम समय पर नहीं उठाए गए, तो भविष्य में और बड़े हादसे हो सकते हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button