वरिष्ठ साहित्यकार जिया लाल आर्य को मिला बाबा साहब अम्बेडकर पुरस्कार
साहित्य प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया पांच लाख रुपए की धनराशि का पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र
हाशिए पर रहने वाले समुदायों के विकास और हिंदी साहित्य में योगदान के लिए बिहार के मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने दिया पुरस्कार
तीन दर्जन पुस्तकें, प्रकाशित, बाल्मीकि रामायण प्रेस में
दलित राजनीति और सामाजिक चेतना को बहुजन साहित्य भी लिखा
जीवन के पचासी बसंत पूरे किए, पूर्णतः स्वस्थ,रोज दो घंटे लिखते हैं
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। पिछले सप्ताह जीवन के पचासी बसंत पूरे कर चुके अमेठी की धरती के लाल वरिष्ठ साहित्यकार जियालाल आर्य हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों पुरस्कृत हुए हैं।हाशिये पर रहने वाले समुदायों के विकास और हिंदी साहित्य में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2023-24का बाबा साहब अम्बेडकर पुरस्कार प्रदान किया गया है।
श्री आर्य को बिहार सरकार की ओर से पांच लाख रुपए की धनराशि का अम्बेडकर पुरस्कार मिलने पर अमेठी के साहित्य प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त किया है।
जिया लाल आर्य की तीन दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्यिक -सांस्कृतिक अध्ययन के लिए वे इंग्लैंड, फ्रांस, इटली, स्विट्जरलैंड यू एस ए और दक्षिण अफ्रीका का भ्रमण कर चुके हैं। विश्व हिंदी सम्मेलन जोहान्सबर्ग में उन्हें सम्मानित किया गया था।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के बिहार कैडर के आई ए एस श्री आर्य लम्बे समय तक बिहार के गृह सचिव भी रहे हैं। 1989में उन्हें बिरसा भगवान पुरस्कार योजना सम्मान मिला।1990में महाप्राण कर्पूरी ठाकुर सम्मान,1997में डॉ अम्बेडकर सम्मान 2001में अमेठी रत्न और 2005में कर्पूरी ठाकुर साहित्य रत्न सम्मान मिला है। बिहार में उन्हें महात्मा गांधी शिखर सम्मान,नई धारा रचना सम्मान भी मिल चुका है।
अब तक उनके छः कथा संग्रह, एक महाकाव्य, पांच काव्य संग्रह, पांच उपन्यास, पांच -काव्य, दो बार साहित्य,चार जीवनी, स्वतंत्रता आन्दोलन पर चार पुस्तकें,चार यात्रा वृत्तांत, और पांच अन्य रचनाएं प्रकाशित हो चुकी है। बाल्मीकि रामायण पर आधारित उनकी रचना प्रकाशन के अधीन है।
जिया लाल आर्य का महाकाव्य बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के जीवन दर्शन पर आधारित है।
महात्मा फुले, सावित्री बाई फुले, वीरांगना झलकारी बाई के जीवन दर्शन पर आधारित उनकी रचनाओं को बिहार, उत्तर भारत के सभी राज्यों के साथ महाराष्ट्र में भी बहुजनों के बीच लोकप्रिय है।
उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति के उभार के समय -दलित कहां जांय नाम की उनकी पुस्तक पाठकों के बीच आई ,यह पुस्तक सबसे अधिक चर्चा में रही है।
कवि राम चन्द्र सरस ने कहा कि जिया लाल आर्य जी ने अपनी साहित्यिक सेवाओं के माध्यम से दुनिया में अमेठी का सम्मान बढ़ाया है।
अवधी साहित्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ अर्जुन पांडेय ने कहा कि जिया लाल आर्य जी अमेठी के गौरव है।उनका साहित्य अमेठी के घर घर में पढा जाना चाहिए।
साहित्य प्रेमी डॉ अंगद सिंह, वरिष्ठ संस्कृत साहित्यकार डॉ ज्वलंत कुमार शास्त्री, डॉ धनंजय सिंह,साहित्यकार बृजलाल, शिक्षक इन्द्र पाल गौतम, डॉ सुनील दत्त, रामचंद्र, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नन्हे लाल, रमेश कुमार कोरी , सूर्यबली गौतम, सूरज भारती आदि ने श्री आर्य को पुरस्कार मिलने पर खुशी जताई है और उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की है।

