हाईकोर्ट का आदेश – पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य के आभाव मे गिरफ्तारी पर रोक
याची ने अधिवक्ता अभीष्ट विक्रम सिंह के माध्यम से दाखिल की थी याचिका

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत के आभाव मे याचिकाकर्ता को सूचीबद्ध करने की अगली तारीख तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसके खिलाफ पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत उपलब्ध नहीं है
यह मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (B.N.S.), 2023 की धारा 115(2), 352, 351(2), 351(3), 308(5) तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन, 2015) की धारा 3(1)Da, 3(1)Gha और 3(2)(va) के तहत दिनांक 06.12.2024 को जनपद अमेठी के थाना पीपरपुर मे दर्ज की गई एफ आई आर संख्या 134/2024 से जुड़ा हुआ है।
याची के अधिवक्ता ने कहा- झूठे मुकदमे मे फंसाने के लिए दर्ज करायी गई है एफ.आई.आर.
याचिकाकर्ता के विद्वान अधिवक्ता ने न्यायालय से कहा है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में याचिकाकर्ता के खिलाफ किए गए सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और अविश्वसनीय हैं, क्योंकि मुख्य आरोप यह है कि याचिकाकर्ता ने अपने फोन पे खाते में 2000 रुपये प्राप्त किए थे, जो कि झूठा आरोप है, अधिवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि लगाए गए आरोप सच्चाई से परे हैं और अदालत को इन्हें नहीं मानना चाहिए , उपरोक्त तथ्यों पर विचार करते हुए न्यायालय ने लोकेंद्र प्रताप सिंह उर्फ विकास सिंह की गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक लगाते हुए निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करेगा और पूछे जाने पर जांच अधिकारी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराएगा यदि वह ऐसा नहीं करता है तो इस अंतरिम आदेश को रद्द करने के लिए इसे आधार बनाया जा सकता है | मुकदमा अपराध संख्या 134/2024 के संबंध में न्यायालय ने कहा है कि जांच के दौरान याची के खिलाफ कोई ठोस पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य जब तक नही मिलते हैं तब तक उसकी गिरफ्तारी नही किया जाएगा साथ ही न्यायालय ने विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी करने व राज्य सरकार से इस याचिका पर चार सप्ताह के भीतर प्रति-शपथपत्र दाखिल किए जाने का आदेश जारी किया है |
याचिकाकर्ता ने बताया कि विपक्षी द्वारा उसे झूठे मुकदमे मे फसाने की साजिश रची गई है जिसके खिलाफ खुद को निर्दोष साबित करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने हेतु अधिवक्ता अभीष्ट विक्रम सिंह के माध्यम से हमारे द्वारा याचिका दाखिल की गयी थी जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने गिरफ्तारी मे राहत प्रदान किया है, हम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए जांच मे सहयोग करेगे और खुद को निर्दोष साबित करेगे |

