गोड्डा

कस्बा मदरसा पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए बसंतराय में  कैंडल मार्च

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बसंतराय। महागामा कस्बा मदरसा छात्रा को लेकर बसंतराय प्रखंड मुख्यालय स्थित अहमदनगर से अंबेडकर चौक तक स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों, छात्र-छात्राओं और बुद्धिजीवियों ने एकजुट होकर कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च में शामिल लोग हाथों में मोमबत्ती लिए “अमरून को न्याय दो”, “दोषियों को गिरफ्तार करो” और “सीबीआई जांच कराओ” जैसे नारे लगा रहे थे। अहमदनगर से  शुरू होकर मुख्य बाजार होते हुए विभिन्न मार्गों से गुजरकर पुनः अंबेडकर चौक पर आकर समाप्त हुआ। शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों ने अमरून की आत्मा की शांति के लिए मौन धारण भी किया।
परिजनों ने उठाई सीबीआई जांच की मांग
अमरून के परिजनों ने कहा कि अब तक की जांच में कई सवाल अनुत्तरित हैं। स्थानीय पुलिस मामले की तह तक नहीं पहुँच पा रही है, जिससे न्याय की उम्मीद धूमिल होती जा रही है। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक सीबीआई जांच नहीं होगी, असली अपराधी बेनकाब नहीं हो पाएंगे। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की गुहार लगाई।
लोगों में आक्रोश, न्याय की आस कैंडल मार्च में शामिल ग्रामीणों और युवाओं ने कहा कि अमरून की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की रफ्तार धीमी है और पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। लोगों का कहना था कि यह सिर्फ अमरून का मामला नहीं बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और न्याय से जुड़ा सवाल है।
प्रतिनिधियों और समाजसेवियों की प्रतिक्रिया
विधायक प्रत्याशी परिमल ठाकुर. नसीम भावी जिला परिषद प्रत्याशी. प्रवक्ता जियाउल हक सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने भी सीबीआई जांच की मांग को समर्थन देते हुए कहा कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का दायरा और व्यापक किया जाएगा।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाए। यदि सरकार और प्रशासन इस मामले की अनदेखी करते हैं, तो जनता सड़क पर उतरने को मजबूर होगी।
शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए इस कैंडल मार्च ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि न्याय में देरी जनता को स्वीकार नहीं है। अब सबकी निगाहें सरकार और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं।
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