लखनऊ

यूपी में निजी शिक्षण संस्थानों की सघन जांच के आदेश जारी

आईएएस एमपी अग्रवाल का कमिश्नर को पत्र

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत हो रही है। प्रमुख सचिव आईएएस एमपी अग्रवाल ने राज्य के निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों की गहन जांच के लिए कमिश्नर को एक कड़ा पत्र जारी किया है। यह कदम शैक्षिक अनियमितताओं पर लगाम कसने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पारदर्शिता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।पत्र में हालिया शिकायतों का हवाला देते हुए, आईएएस अग्रवाल ने संस्थानों में व्याप्त कथित अनियमितताओं—जैसे अवैध फीस वसूली, योग्यता की कमी और नियामक मानकों के उल्लंघन—पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उनका उद्देश्य है कि शिक्षा केवल व्यापार न बने, बल्कि एक विश्वसनीय और समावेशी प्रणाली बने।मान्यता और अनुपालन: सभी निजी संस्थानों की यूजीसी (UGC), एआईसीटीई (AICTE), एनसीटीई (NCTE) और अन्य नियामक निकायों से प्राप्त मान्यता की गहन समीक्षा। साथ ही, राज्य सरकार के 30/90 शासनादेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना। प्रशासनिक पारदर्शिता: प्राचार्य, शिक्षक और अधिकारियों की नियुक्ति, योग्यता और सेवा शर्तों की जांच। छात्रों से ली जाने वाली फीस, छात्रवृत्ति वितरण और वित्तीय लेन-देन की पूरी पारदर्शिता। शिकायत निवारण: छात्रों, अभिभावकों और हितधारकों की शिकायतों की स्वतंत्र जांच। दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्दीकरण, जुर्माना या कानूनी कार्रवाई की संभावना।समिति और समयसीमा: जांच के लिए बहु-विभागीय समिति का गठन, जिसमें शिक्षा, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शामिल। समिति को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार की शिक्षा सुधार एजेंडे का हिस्सा है, जो हाल में नए निजी संस्थानों की मंजूरी के बाद गुणवत्ता नियंत्रण पर फोकस कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राज्य में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठेगा और छात्रों को धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा। यदि अनियमितताएं साबित होती हैं, तो प्रभावित संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई तय है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button