बरेली

जीव का उद्देश्य भगवत प्राप्ति :आचार्य श्याम बिहारी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली :  विक्रमादित्य पुरी में चल रही श्रीमद् भागवत में, वृंदावन धाम से पधारे आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने, प्रथम दिन की कथा सुनाते हुए महात्म की चर्चा सुनाई,  श्रीमद् भागवत में महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि  महत्व को सुनने से भागवत के सार का बोध होता है, इस कथा में उन्होंने आत्मदेव नाम के ब्राह्मण की कथा सुनाई,  आत्मदेव नाम के ब्राह्मण जिनकी पत्नी का नाम धुंधली था, उन्होंने जीवन भर पूजा पाठ किया लेकिन,  उनके कोई संतान नहीं हुई ,तब  किसी सन्त पूछा क्या कारण है, सन्त ने उनको फल दिया, पत्नी धुंधली को दिया,  फल गाय को खिला दिया, अपने बहन से बेटा ले लिया, कह दिया यह मेरा है, इनका जो बेटा बनकर के आया उसका नाम धुंधकारी रखा गया ,और गाय का जो फल खाने से बेटा हुआ उसका नाम गोकर्ण  रखा, गोकर्ण पंडित  ज्ञानी हुए, धुंधकारी महा दुष्ट हुआ, जब धुंधकारी ने अपने  पिता को व्यथित किया , तब पिता ने गोकर्ण जी के समझाने पर घर छोड़ दिया, और उनकी माता ने भी अपने आप को कुएं में गिरकर की समाप्त कर दिया, धुंधकारी पांच-पांच वेश्याओं को लाया , उन वेश्याओं ने धुंधकारी को मारा, जिसके कारण असमय में मृत्यु होने के कारण वह एक विशाल प्रेत बना,प्रेत के उद्धार के लिए भागवत कथा गोकर्ण जी को सुनाई , मोक्ष प्राप्त हुआ, भागवत का सार यही है कि जो व्यक्ति मननपूर्वक कथा सुनता है,उसको जरूर मोक्ष प्राप्त होता है ! इस मौके  डॉक्टर बागीश वैश्य, बबीता वैश्य,मीरा,उमा,रमा वैश्य, प्रभाकर गुप्ता और  भजन गायक जगदीश भाटिया जी पहुंचे, और भी बहुत श्रोता समुदाय कथा सुनने पहुंचे  !
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