अमेठी
तनिक धीरे चलो पुरवाई, अचरा मोरा उड़ि उड़ि जावै–जगदम्बा तिवारी मधुर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। गुरुवार को अवधी साहित्य संस्थान अमेठी की ओर से स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद सभागार, प्रमोद आलोक इंटर मीडिएट कॉलेज, मंगलपुर,अमेठी में पूर्व गृह सचिव जियालाल आर्य की अध्यक्षता में मां सरस्वती जी एवं गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं हौसला प्रसाद त्रिपाठी कुमार तरल की वाणी वंदना से हुआ। अध्यक्ष अवधी साहित्य संस्थान डॉ. अर्जुन पाण्डेय ने देश के कोने कोने से आए कवि एवं साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कहा कि कला एवं संगीत हिंदी साहित्य के बिना संभव नहीं है।
अध्यक्षता करते हुए जियालाल आर्य ने कहा कि निज भाषा, निज संस्कृति एवं निज देश पर सबको गर्व होना चाहिए। आंध्र प्रदेश की प्रो. विजया भारती जेल्दी की काव्य पंक्ति – हिंदी केवल उत्तर की ही नहीं, संपूर्ण भारत की प्यारी भाषा है। सुनील वाजपेई की पंक्ति – बन जाने से पहले मैया, मुझको बुला लिया होता, क्या अपराध हुआ है मुझसे, यह तो बता दिया होता। बघेली कवि – बैठ न्याय के देवी आंखी पट्टी बांधे, इया जिंदगी पूर जिंदगी नाच नचाबे। प्रतिभा पांडेय – बहुत बड़े मत बनना, छोड़ेपन का मजा अनूठा है। जगदम्बा तिवारी मधुर – तनिक धीरे चलो पुरवाई, अचरा मोरा उड़ि उड़ि जावै। शब्बीर अहमद सुरी – इश्क मुश्किल है जहां में पग सम्भल कर आज रखना। डॉ. प्रिया ठाकुर – मां के जितना इस दुनिया में मुझे कोई चाह नहीं सकता। हरिनाथ शुल्क हरि – कहि पूरनिये गयेन ई कहानी सखी, अवधी आ लोक भषवन कै रानी सखी। रश्मि शुक्ला शील – मात पिता इस दुनिया में ईश्वर सम होते हैं।आशिक रायबरेली – ये है मोहब्बत मौत के मुंह से छीन लिया।रामेश्वर सिंह निराश – गंगा कै अस्तित्व खतरे मा बाटे, सब सुख तौ माई के अचरा मा बाटे। राम बदन शुक्ल पथिक – मैं भी दीवाना हूं, वो भी दीवानी है। प्रयास जोशी भोपाल – ताकि जब पानी बरसे तो इसी पहाड़ से फूट पड़े झरने। अनुपम पाण्डेय ने कहा ये जो बरकत है तुम्हारे कदम चूमेगी,दरो दीवार पर मां बाप की निशानी रखना,ज्ञानेंद्र पांडेय अवधी मधुरस, शिवाकांत त्रिपाठी,अरुण तिवारी बोले चिरैया,अनीस देहाती, सुजाता नुना, आरती दुबे, पुरुषोत्तम तिवारी साहित्यार्थी, आशिक रायबरेली, अमर बहादुर सिंह अमर, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल अमरेश, पप्पू सिंह कसक, एस पी मिश्रा, कुंज बिहारी लाल मौर्य काका श्री, श्रीनाथ मौर्य सरस, इंद्रजीत सिंह अर्जक, राम लखन तिवारी, नरेंद्र प्रताप शुक्ल, जानकी गुप्ता, पुष्पेंद्र पांडेय आदि कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया।
काव्य पाठ के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में आंध्र विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष प्रो. जे विजया भारती एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. हेमराज मीणा, राजेश विक्रांत एवं डॉ. शिवम् तिवारी एवं डॉ अभिमन्यु पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।अंत में प्रबंधक डा. देवमणि पाण्डेय ने कवियों एवं साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मेलन समारोह का संचालन हौसिला प्रसाद तिवारी कुमार तरल ने किया।


