धर्ममुरादाबाद

गुलज़ारीमल की धर्मशाला में चार दिवसीय सामवेद परायण यज्ञ और संस्था के 30वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हुआ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। आचार्य सोमदेव शास्त्री ने सामवेद और न्याय दर्शन के मंत्रों की व्याख्या की। उन्होंने कहा—“दुःख का मूल कारण बार-बार जन्म लेना है। केवल मोक्ष अवस्था में ही जन्म-मरण का चक्र समाप्त हो सकता है
वेद प्रचार मण्डल द्वारा गुलज़ारीमल की धर्मशाला में चार दिवसीय सामवेद परायण यज्ञ और संस्था के 30वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हुआ। यज्ञ का संचालन आचार्य सोमदेव शास्त्री ने वैदिक रीति से सम्पन्न कराया।
यज्ञोपरांत अंतर्राष्ट्रीय भजनोपदेशक अमृता आर्य ने भक्ति रस से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति दी 
यज्ञ में यजमान के रूप में रमेश सिंह आर्य एडवोकेट, छाया रानी, निर्मल आर्य, प्रीता आर्य, हिमांशु रस्तोगी, निम्मी रस्तोगी, प्रमोद कुमार यादव, अनिता यादव, नवनीत कुमार, भावना रुहेला, अखिलेश रस्तोगी, सुषमा रस्तोगी सहित कई परिवार सम्मिलित रहे। यज्ञोपरांत अंतर्राष्ट्रीय भजनोपदेशक अमृता आर्य ने भक्ति रस से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति दी। तत्पश्चात आचार्य सोमदेव शास्त्री ने सामवेद और न्याय दर्शन के मंत्रों की व्याख्या की। उन्होंने कहा—“दुःख का मूल कारण बार-बार जन्म लेना है। केवल मोक्ष अवस्था में ही जन्म-मरण का चक्र समाप्त हो सकता है और मोक्ष यम-नियमों का पालन करने से ही प्राप्त होता है।”
जन्म, जरा, व्याधि और मृत्यु सहित सभी अवस्थाएँ जीव को पीड़ा देती हैं
आचार्य जी ने न्याय दर्शन में बताए गए दुःखों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि महर्षि गौतम ने दुःख को पाँच प्रकार का, महर्षि पतंजलि ने चार प्रकार का, कपिल मुनि ने तीन प्रकार का और मनु ने एक प्रकार का दुःख बताया है। जन्म, जरा, व्याधि और मृत्यु सहित सभी अवस्थाएँ जीव को पीड़ा देती हैं।
इस अवसर पर अरविंद आर्यबंधु, मयंक आर्य, आचार्य भूपेंद्र शास्त्री, पं. लालकिशोर शास्त्री, पं. वीरेंद्र आर्य, डॉ. अभय श्रोत्रिय, अजब सिंह आर्य, प्रभा सैनी, लोकेश आर्य, यशपाल आर्य, उमेश आर्य, पूनम शास्त्री, ऊषा गुप्ता, सुषमा श्रीधर, आशा जैमिनी, मीरा सोती, वीरेंद्र कत्याल, मनोज योग गुरु सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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