बड़ौत में किन्नर गुटों की जंग
असगर ग्रुप ने चांदनी ग्रुप के किन्नर की बीच सड़क पर की बर्बर पिटाई, मेडिकल जांच की मांग तेज

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। बड़ौत कस्बा इन दिनों किन्नर समाज के अंदरूनी विवाद से थर्रा गया है। करीब दो सप्ताह पहले यह विवाद हिंसक रूप ले बैठा था, जब असगर ग्रुप के किन्नरों ने चांदनी ग्रुप की एक सदस्य पर बीच हाईवे पर हमला कर दिया। देखते ही देखते लाठी-डंडों और लात-घूसों से हुई बर्बर पिटाई ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
घटना का पूरा घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चांदनी ग्रुप का किन्नर बधाई लेने के लिए पास के एक गांव जा रहा था। जैसे ही वह मुख्य हाईवे पर पहुंचा, पहले से घात लगाए असगर ग्रुप के लगभग एक दर्जन लोग वहां आ धमके। आरोप है कि उन्होंने अचानक उस पर धावा बोल दिया।
हमलावरों ने उसे जमीन पर गिरा दिया और लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ वार करने लगे। कुछ लोगों ने बाल खींचे तो कुछ ने थप्पड़ और घूंसे बरसाए। सड़क पर चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते राहगीरों की भारी भीड़ जुट गई।
स्थानीय लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव कर पीड़ित को छुड़ाया और अस्पताल में भर्ती कराया। लगभग तीन सप्ताह तक इलाज चला, जिसके बाद वह अब जाकर घर लौटा है।
चांदनी ग्रुप का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि असगर नाम का व्यक्ति असल में किन्नर नहीं है।
“वह भरे-पूरे परिवार का स्वामी है, लेकिन लालच के चलते नकली किन्नर बन बैठा है। यही पूरे विवाद की जड़ है। हमने जब उसका विरोध किया तो हमारे साथी पर हमला करा दिया। अगर प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”
चांदनी किन्नर ने मांग की –
“असगर का मेडिकल परीक्षण हो। अगर वह नकली पाया जाता है तो जेल भेजा जाए और समाज को गुमराह करने पर उस पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हो।”
असगर ग्रुप का पलटवार
दूसरी ओर असगर ग्रुप ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा –
“चांदनी ग्रुप इलाके में दादागिरी करता है। शादी-ब्याह में जबरन बधाई वसूली करता है। हमने जब उन्हें चुनौती दी तो वे हम पर झूठे आरोप मढ़ने लगे। असली-नकली का सच मेडिकल रिपोर्ट से सामने आ ही जाएगा।”
यूनियन अध्यक्ष का बयान
भारतीय किसान यूनियन (भानू) के जिला अध्यक्ष राजीव चौधरी ने कड़ा बयान देते हुए कहा –
“असगर का किन्नर समाज से कोई लेना-देना नहीं है। वह नकली है और इसी वजह से विवाद की जड़ बना हुआ है। यूनियन चांदनी ग्रुप के साथ खड़ी है और मांग करती है कि असगर को बधाई लेने से रोका जाए। जब तक असली-नकली का फर्क साबित नहीं होता, प्रशासन को असगर पर रोक लगानी चाहिए।”
माहौल तनावपूर्ण
कलेक्टरेट में पहले ही धरना-प्रदर्शन कर चुके यूनियन कार्यकर्ता अब मामले को लेकर और आक्रामक हो गए हैं। उनका कहना है कि नकली किन्नरों की वजह से असली किन्नरों का हक छीना जा रहा है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों गुटों को थाने बुलाकर बयान दर्ज कर लिए हैं। मेडिकल जांच की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। लेकिन बड़ौत कस्बे में किन्नर समाज की यह अंदरूनी लड़ाई अब आम जनता की भी चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।



