भागवत कथा में ध्रुव और विदुर चरित्र का वर्णन
भगवान प्रेम व भाव के भूखे :- पं श्री रोहित रीछारीया जी महाराज

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
दिव्य धाम श्री बालाजी मन्दिर मे चल रही सप्त दिवसीय श्री मद भागवत महाकथा के तृतीय दिवस की कथा का श्रवण कराते हुए श्री बागेश्वर धाम से पधारे कथा व्यास श्री रोहित जी महाराज ने भक्तो को विदुर जी व ध्रुव के चरित्र का बहुत ही सुंदर वर्णन किया कथा आरम्भ होने से पूर्व स्वामी श्री अशोकांचार्य जी व स्वामी श्री यश्वर्धनाचार्य जी महाराज ने पूर्ण विधि विधान से व्यास पीठ का पूजन कर व्यास जी महाराज को पुष्प माला पहना कर महाराज श्री को परनाम कर व्यास पीठ की आरती करि उसके पश्चात व्यास जी महाराज ने भक्तो को कथा सुनाते हुए बताया कि विदुर और ध्रुव दो अलग-अलग भारतीय पौराणिक चरित्र हैं जिनके जीवन से महान शिक्षाएं मिलती हैं। विदुर, महाभारत काल के एक ज्ञानी और धर्मी सलाहकार थे, जिन्होंने हमेशा सत्य और न्याय का पक्ष लिया और धृतराष्ट्र व दुर्योधन को कई बार सही सलाह दी, भले ही उसे अनसुना किया गया। दूसरी ओर, ध्रुव एक पाँच वर्षीय बालक थे जिन्होंने भगवान को पाने के लिए सच्ची भक्ति और लगन से तपस्या की और अंततः भगवान को प्रसन्न किया, यह दिखाते हुए कि प्रेम से बड़ी कोई वस्तु नहीं है।
विदुर जी के चरित्र का वर्णन सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि विदुर अपनी अपार बुद्धिमत्ता और सत्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। वह महाभारत के एक ऐसे पात्र थे जिन्होंने धर्म और न्याय का हमेशा पक्ष लिया। वह हस्तिनापुर के प्रधान मंत्री थे और उन्होंने राजा धृतराष्ट्र को हमेशा सही सलाह दी, खासकर दुर्योधन के बुरे कर्मों और पांडवों पर उसके अत्याचारों को रोकने के लिए। जब धृतराष्ट्र और दुर्योधन उनकी सलाह नहीं मानते थे, तो विदुर ने त्यागपत्र दे दिया, लेकिन बाद में युधिष्ठिर ने उन्हें उनके पद पर फिर से बहाल कर दिया। विदुर और उनकी पत्नी ने भगवान श्रीकृष्ण को केले के छिलके पर भोजन कराया, जिससे भगवान ने सिखाया कि प्रेम और भक्ति भौतिक धन से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।
ध्रुव का चरित्र सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि ध्रुव एक पाँच वर्षीय बालक थे जिन्होंने अपने पिता और सौतेली माँ की उपेक्षा के बाद भगवान विष्णु को प्राप्त करने का निश्चय किया। उन्होंने सच्ची भक्ति और अटूट मन से तपस्या की, जिसके बाद स्वयं भगवान उनके पास आए। ध्रुव का चरित्र यह सिखाता है कि यदि एक बालक सच्चे मन से भक्ति करे, तो भगवान भी स्वयं उससे मिलने आते हैं। विदुर के प्रसंग के साथ जोड़कर, ध्रुव की कथा हमें याद दिलाती है कि भगवान प्रेम के भूखे होते हैं और प्रेम के द्वारा ही उन्हें पाया जा सकता है। इस अवसर पर प्रिंस गोयल,आरती गोयल,नेहा गोयल,पं सूरज,रजत,यश,संजीव,हर्ष शर्मा,योगेंद्र उमेश, देवेंद्र, तरुण, प्रिंस, कपिल गोयल, सुशील, संजीव वर्मा,नीलम,अनिता गोयल, मिनाक्षी, श्रीमति, प्रीति शर्मा अर्चना, अलका, आरती, पूजा, शशि सहित सैकडो की संख्या मे भक्त जन उपस्थित रहे!



