KGMU ट्रॉमा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जूनियर रेजिडेंट्स का जानलेवा हमला,
नर्सिंग डिपार्टमेंट का धरना

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लखनऊ : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में शनिवार (20 सितंबर) देर रात एक गंभीर घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और सुरक्षा के मुद्दों को उजागर किया है। ट्रॉमा सेंटर के ऑर्थोपेडिक्स ऑपरेशन थिएटर (OT) में शराब के नशे में धुत तीन जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स (JR 1, 2 और 3) ने नर्सिंग ऑफिसर शुभम पर कथित तौर पर जानलेवा हमला किया, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस घटना के विरोध में आज (22 सितंबर) नर्सिंग डिपार्टमेंट ने ट्रॉमा सेंटर पर धरना शुरू कर दिया, जिसमें प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार रात ऑर्थो OT में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर शुभम पर तीन जूनियर रेजिडेंट्स ने हमला किया। आरोप है कि रेजिडेंट्स शराब के नशे में थे और उन्होंने अकेले पाकर शुभम को निशाना बनाया। हमले में घायल शुभम ने तुरंत ट्रॉमा सेंटर पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दर्ज की और मेडिकल कॉलेज के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (CMS) को घटना की जानकारी दी। शुभम ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना के दो दिन बाद भी CMS द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से नर्सिंग स्टाफ में भारी नाराजगी है। नर्सिंग डिपार्टमेंट ने इसे प्रशासन की लापरवाही करार देते हुए सोमवार को ट्रॉमा सेंटर पर धरना शुरू किया। प्रदर्शनकारी नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं और मरीजों की देखभाल पर भी असर डालती हैं।
गंभीर सवालों पर बहस
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
.शराब का सेवन: ट्रॉमा सेंटर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शराब पीकर मेडिकल स्टूडेंट्स को मरीजों का इलाज करने की अनुमति कैसे मिली?
.सुरक्षा की कमी: अकेले नर्सिंग ऑफिसर पर हमला करने की हिम्मत जूनियर रेजिडेंट्स को कैसे हुई? क्या OT में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं?
.प्रशासन की भूमिका: CMS की चुप्पी और कार्रवाई में देरी क्यों? क्या मेडिकल स्टूडेंट्स को संरक्षण दिया जा रहा है?
KGMU का महत्व और घटना का प्रभाव
KGMU का ट्रॉमा सेंटर उत्तर भारत में गंभीर दुर्घटना मामलों के लिए एक प्रमुख केंद्र है। हाल ही में 17 सितंबर 2025 को ट्रॉमा सेंटर में हेल्प डेस्क और जनरल OT का उद्घाटन हुआ था, जिसका उद्देश्य मरीजों को बेहतर सुविधाएं देना था। लेकिन इस तरह की आंतरिक हिंसा न केवल कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ती है, बल्कि मरीजों की देखभाल पर भी सवाल उठाती है।
नर्सिंग डिपार्टमेंट की मांग
धरने पर बैठे नर्सिंग कर्मियों ने निम्न मांगें रखी हैं:
.दोषी जूनियर रेजिडेंट्स के खिलाफ तत्काल निलंबन और कानूनी कार्रवाई।
.ट्रॉमा सेंटर में CCTV, रात की शिफ्ट में सिक्योरिटी गार्ड और अल्कोहल टेस्टिंग पॉलिसी लागू करना।
.स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए सख्त दिशानिर्देश और प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करना।
नर्सिंग कर्मियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा। इस मामले में KGMU प्रशासन, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं मेडिकल संस्थानों में अनुशासन और पेशेवर नैतिकता की कमी को दर्शाती हैं, जिसका समाधान जरूरी है।




