सिंगरौली

 नवजात  शिशु का 8 लाख रुपये में सौदा, 

खुटार सीएचसी स्टाफ की सजगता से बचा नवजात शिशु

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। खुटार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मंगलवार को एक बड़ा मामला सामने आया, जब सात घंटे पहले जन्मे नवजात शिशु का सौदा आठ लाख रुपये में करने की कोशिश की गई। हालांकि, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की सजगता से यह सौदा टल गया और मामला पुलिस तक पहुंच गया।
कैसे खुला मामला
जानकारी के अनुसार, मंजू साकेत पति अनिल कुमार साकेत (उम्र 32 वर्ष), निवासी कसुआ राजा, सोमवार रात डिलीवरी के लिए सीएचसी खुटार में भर्ती हुई थीं। रात करीब 2 से 3 बजे के बीच उन्होंने नवजात बेटे को जन्म दिया। स्टाफ का कहना है कि भर्ती होते ही प्रसूता के परिजनों और दूसरे पक्ष के बीच नवजात को लेकर मोलभाव शुरू हो गया था। सुबह करीब 10 बजे पति अचानक नवजात को लेकर अस्पताल से बाहर जाने लगा। उसी समय प्रसूता मंजू ने रोते हुए शोर मचाया और आरोप लगाया कि उसका पति बच्चे को बेचने ले जा रहा है। तुरंत ही डॉक्टर और स्टाफ ने खुटार चौकी पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और प्रसूता, नवजात, पति सहित दूसरे पक्ष के लोगों को चौकी लेकर गई।
चार लाख रुपये देने की तैयारी
अस्पताल स्टाफ के मुताबिक, नवजात को सौंपने के बदले चार लाख रुपये देने की तैयारी थी और दूसरा पक्ष नकदी लेकर भी पहुंचा था। सूत्रों के अनुसार मोलभाव में तीन महिलाएं शामिल थीं, जिनमें से दो को पुलिस ने पहले ही गाड़ी में बैठने को कह दिया था।
रिश्तेदारी का मामला निकला
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों पक्ष आपस में रिश्तेदार हैं। प्रसूता की ननिहाल बरगवां में है और वहीं की एक रिश्तेदार महिला को बेटा नहीं है। पहले से ही आपसी सहमति बनी थी कि यदि बेटे का जन्म होगा तो उसे दे दिया जाएगा। मंजू पहले से पांच बच्चों की मां हैं, जिनमें तीन बेटियां और दो बेटे शामिल हैं।
पुलिस और डॉक्टरों का पक्ष
सीएचसी प्रभारी डॉ. अभय रंजन सिंह ने बताया, प्रसूता ने स्वयं रोते हुए बताया कि नवजात को बेचने ले जाया जा रहा है। स्टाफ ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस कार्रवाई कर रही है।
खुटार चौकी प्रभारी शीतला यादव ने कहा, पूछताछ के बाद प्रसूता, पति और नवजात को घर भेज दिया गया है। दूसरे पक्ष का बयान दर्ज किया जा रहा है। यह सही है कि दोनों पक्ष रिश्तेदार हैं और बेटे को देने-लेने की सहमति बनी थी। फिर भी यह प्रक्रिया कानूनी रूप से बाल कल्याण समिति के माध्यम से ही संभव है। समिति को पत्र भेजकर मामले की जानकारी दी जाएगी।
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