विश्व नदी दिवस के अवसर पर दशरथ घाट पर हुआ विचार-विमर्श

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। रविवार को विश्व नदी दिवस के अवसर पर जनपद की नदियां एवं जलस्रोविश्व नदी दिवस के अवसर पर त
विषय पर अमेठी जलबिरादरी की ओर से मालती नदी के दशरथ घाट पर विचार-विमर्श का शुभारम्भ नदी पूजन के साथ हुआ।
अमेठी जलबिरादरी के अध्यक्ष डॉ अर्जुन पाण्डेय ने विषय का प्रवर्तन करते हुए कहा कि जनपद अमेठी मालती एवं उज्जयिनी नदियों की उपज है।विगत पांच दशक पूर्व बर्ष भर सतत प्रवाहित होने वाली इन नदियों में आज केवल बर्षा के दिनों में जल देखने को मिलता है।जनपद के बचे-खुचे तालाबों में गाद के जबरदस्त जमाव के कारण चौमासे में होने वाली बर्षा जल का संचयन न होने से भूगर्भ जल स्तर का तेजी से गिरना चिंता का विषय है।मुख्य अतिथि पानी पत्रकार अरुण तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज अपने छोटे- छोटे काम तय करे।
जनपद में अत्यधिक जलदोहन रुके।इसके लिए रेलनीर प्लांट एवं कोका कोला के साथ अनधिकृत बाउलिंग प्लांट तथा अहितकर योजनाओं के रोक-टोक की जरूरत है। अध्यक्षता करते हुए बलदेव सिंह ने कहा कि दशरथ घाट पर प्रति बर्ष नवरात्र पर सैकड़ों की संख्या में मूर्तियों का विसर्जन तभी सम्भव है जब मालती नदी सतत प्रवाहित होती रहे। कैलाश सिंह ने कहा कि मालती एवं उज्जयिनी साल भर बहे इसके लिए जनपद के मसियांव,तिलोई,मैहार रैदहा,कसरांवा,समदा, चंदवा,बढ़ैला एवं बढ़नी आदि तालों में जमें गाद की निकासी की व्यवस्था की जाय।
अम्बरीष मिश्र ने कहा कि बरसात के बीस प्रतिशत जल को धरती के पेट में डालकर ही नदियों एवं एवं तालाबों जीवित रख सकते हैं। इसके लिए जनमानस को जिम्मेदारी लेनी होगी।अमर बहादुर सिंह ने कहा कि बरसात में होने वाली वर्षा जल संचयन से ही गिरते भूगर्भ जल स्तर को उठाया जा सकता है।राम बरन पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान जल संकट से उबरने के लिए पुरानी पीढ़ी के जल कौशल को समझना होगा। गिरीश तिवारी ने कहा कि जनपद पानीदार बने इसके लिए युवा पीढ़ी को जागरूक करने की जरूरत है।विचार-विमर्श के दौरान महराजदीन प्रधान सहित जगदम्बा तिवारी, लालजी शुक्ल कालिका तिवारी,गायत्री प्रसाद मिश्र,शिवशंकर पाण्डेय,संजय मिश्र आदि ने अपने विचार रखे।इस अवसर पर अनुभव मिश्र बालकृष्ण ओझा,राम बदन, राम करन,काशी प्रसाद मिश्र,दिनेश कुमार , अंजनी तिवारी, राकेश चंद्र,राम प्रताप, निज़ामुद्दीन एवं शिवलाल आदि मौजूद रहे।कार्यक्रम के समापन पर संकल्प लिया गया कि पर- प्रयोजन में प्लास्टिक का प्रयोग न किया जाए।

