
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
सारनी। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 24 व 25 सहित विभिन्न इलाकों में मजदूर वर्ग गहरी बेरोजगारी और बदहाली से त्रस्त है। रोजगार की कमी के चलते मजदूर परिवार अपना बसेरा छोड़कर लगातार पलायन कर रहे हैं। क्षेत्र की लगभग 40 प्रतिशत आबादी अब तक शहर छोड़ चुकी है और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
बरसात के दौरान मजदूरों व रिटायर्ड कर्मचारियों द्वारा बनाई गई अस्थायी झोपड़ियाँ जर्जर होकर गिरने लगी हैं। फॉरेस्ट विभाग से लीज पर मिली जमीन पर बने ये कच्चे मकान अब कीचड़ और दलदल में तब्दील होकर गलियों और रास्तों को बाधित कर रहे हैं, जिससे बचे हुए रहवासियों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है वर्षों से मजदूर वर्ग खदानें शुरू करने, यूनिट विस्तार, सीमेंट फैक्ट्री और बिजली उत्पादन जैसी औद्योगिक इकाइयों की मांग करता आ रहा है, लेकिन राजनीतिक वादे केवल कागजों तक ही सीमित रहे हैं। विधायक द्वारा घोषित 660 मेगावाट बिजली परियोजना भी फिलहाल चार से पाँच वर्ष दूर मानी जा रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि मजदूर तब तक किस सहारे इस क्षेत्र में टिके रहेंगे स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार बेरोजगारों को प्रति माह पाँच हजार रुपए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराए तो इस पलायन पर रोक लग सकती है। लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और रोजगारहीनता ने मजदूरों के सपनों को बिखेर दिया है। अब उनकी निगाहें सिर्फ ठोस कदम और रोजगार के अवसरों की राह देख रही हैं।



