श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग की कथा
श्रीमद् भागवत कथा में निकली श्री कृष्ण जन्म की झांकी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमरोहा हसनपुर : कोतवाली क्षेत्र के गांव हथिया खेड़ा में चामुंडा मंदिर पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास ने देवकी के आठ संतानों की उत्पत्ति सहित श्रीकृष्ण जन्म की कथा को विस्तार पूर्वक सुनाया कथा वाचक श्री श्याम प्रभु दास जी महाराज ने कथा का वर्णन कृष्ण जन्मोत्सव से प्रारंभ किया। बताया कि द्वापर में मथुरा देश के दो भाग थे तथा दोनों भाग पर दो वंशो के राजा का राज था।पहले बिष्टवंश में दो भाई देवक व उग्रसेन हुए जिसमे देवक बड़े थे जिनके इकलौती पुत्री देवकी थी जो राजपाट छोटे भाई उग्रसेन को सौंपकर भगवान की पूजा करने चले गए । उग्रसेन को एक पुत्र कंस हुआ जो निर्दयी था। पिता को जेल में डाल कर राजा बन गया वहीं दूसरी भाग पर यदुवंश का राज जिसके राजा सूरसेन के 10 पुत्र व पांचवी पुत्री थी ।सूरसेन की बड़ी पुत्री को महाराजा ने मांगा जो बाद में पांडु की मां कुंती हुई । यदुवंश के बड़े पुत्र वासुदेव थे वासुदेव का 17 विवाह हुआ था, अठारहवां विवाह देवकी से हुआ । इसके बाद कंस ने आकाशवाणी को सुनकर दोनों को जेल में डाल दिया । कथा वाचक ने कहा कि भादोमास की अंधियारी रात को अष्टमी के दिन कंस के मथुरा जेल में अचानक अलौकिक प्रकाश फैलने लगा और माता देवकी के गर्भ से श्री कृष्ण का जन्म हुआ। वहां के समस्त बंदी मूर्छित हो गए जेल के दरवाजे खुल गए आकाशवाणी हुई जिसे सुनकर वासुदेव नन्हे बालक रूप में लेकर यमुनापार गोकुल नंद के घर पहुंचकर वहां से नवजात कन्या को लेकर वापस आए । सुबह होते ही गोकुल में नंद बाबा के घर बालक जन्म होने की बात पता चलते ही उत्सव मनाया जाने लगा।भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनकर वहां मौजूद भक्तगण भाव विभोर होकर खुशी से झूम उठे। इस दौरान श्रीमद् भागवत कथा में श्री कृष्ण जन्म की झांकी भी निकल गई। इस मौके पर जगदीश ठेकेदार, देवराज सिंह, डोरी लाल, परसोत्तम सिंह, कमल सिंह, जयकर सिंह, बल्लू सिंह, महेंद्र सिंह, परमी सिंह, दयाराम सिंह, ओमप्रकाश डीलर, चंद्रपाल सिंह ,आदि मौजूद रहे।



