लखनऊ

अवध चौराहे पर 887.36 मीटर लंबा अंडरपास

दिसंबर 2026 तक ट्रैफिक जाम में 40% कमी की उम्मीद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

लखनऊ : लखनऊ के सबसे व्यस्त अवध चौराहे पर निर्माणाधीन अंडरपास का कार्य अब तेजी पकड़ रहा है। यह 887.36 मीटर लंबा अंडरपास वीआईपी रोड को पारा रोड से जोड़ेगा, जिससे आगरा, दिल्ली और कन्नौज की ओर जाने वाले ट्रैफिक का दबाव कम होगा। उत्तर प्रदेश सेतु निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के संयुक्त प्रयास से बन रहे इस प्रोजेक्ट की लागत 121.09 करोड़ रुपये है और इसका समापन 26 दिसंबर 2026 तक होने की उम्मीद है।

ट्रैफिक जाम में 40% कमी का अनुमान
अधिकारियों के अनुसार, इस अंडरपास के बनने से अवध चौराहे पर ट्रैफिक जाम में 40% तक की कमी आएगी, जिससे रोजाना लगभग 5 लाख वाहनों को राहत मिलेगी। यह खास तौर पर आलमबाग, हरदोई और कानपुर रूट पर यात्रियों के लिए लाभकारी होगा। मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने जून 2025 में स्थलीय निरीक्षण के दौरान 24×7 कार्य करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनवरी 2025 में जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने भी प्रगति की समीक्षा कर कार्य को गति देने पर जोर दिया।

आधुनिक सुविधाओं से लैस यह अंडरपास न केवल ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार करेगा, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से भी लैस होगा। इसमें शामिल हैं: उन्नत लाइटिंग सिस्टम: रात के समय बेहतर दृश्यता के लिए LED लाइट्स। जलभराव से बचाव: ड्रेनेज सिस्टम और पंपिंग व्यवस्था से मानसून में जलजमाव की समस्या नहीं होगी। सुरक्षा: 24×7 मॉनिटरिंग के लिए हाई-रेजोल्यूशन CCTV कैमरे। बॉक्स पुशिंग तकनीक: 100 मीटर हिस्से में मजबूत स्टील फ्रेम के साथ यह तकनीक उपयोग की जा रही है।

निर्माण प्रगति और डायवर्जन
नवंबर-दिसंबर 2024 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में मिट्टी और पाइल लोड टेस्टिंग के बाद अब सिविल कार्य तेजी से चल रहा है। वर्तमान में 2 रिंग मशीनें, 1 हाइड्रा, 1 जेसीबी, 2 कंक्रीट पंप और 1 मिनी स्कैवेटर कार्यरत हैं। निर्माण के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन 31 मई 2025 तक लागू रहेगा, जिसके लिए सेतु निगम ने स्थानीय दुकानदारों को सूचित करने के लिए मुनादी भी कराई है।
लखनऊ की स्मार्ट सिटी पहल का हिस्सा यह अंडरपास उत्तर प्रदेश सरकार की स्मार्ट सिटी पहल का हिस्सा है, जो लखनऊ को ट्रैफिक-मुक्त और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सेतु निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह प्रोजेक्ट न केवल ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार करेगा, बल्कि शहर की बुनियादी ढांचा क्षमता को भी बढ़ाएगा।”

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