ललितपुर

 श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया गुरु रामदासजी का प्रकाश पर्व

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ललितपुर। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्रीगुरु सिंह सभा के तत्वाधान में गुरुद्वारा साहिब लक्ष्मीपुरा में श्रीगुरु रामदासजी महाराज का प्रकाश पर्व श्रद्धा भावना व उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही गुरुद्वारा साहिब में श्रीसहज पाठ साहिबजी का समापन उपरांत लंगर का आयोजन स.नरेंद्र सिंह खालसा की ओर से हुआ। गुरबाणी कीर्तन कथा पर अपने विचार रखते हुए मुख्य ग्रंथि ज्ञानी दलजीत सिंह ने कहा कि गुरु रामदासजी महाराज का जन्म (24 सितंबर 1534 को हुआ वह सिख धर्म के चौथे गुरु थे, जिन्होंने 1574 में गुरु अमरदास द्वारा गुरुगद्दी संभाली और 1577 में अमृतसर नामक नगर की स्थापना की, जो आज एक पवित्र शहर है। उन्होंने सिख विवाह की आनंद कारज प्रथा की रचना की और सिख धर्म के लिए गुरु का लंगर प्रथा को आगे बढ़ाया। उन्होंने 688 भजन रचे, जो आदि ग्रंथ में शामिल हैं, और अपने पुत्र गुरु अर्जुन देव को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करके गुरुगद्दी को वंशानुगत बनाया। अध्यक्ष ओंकार सिंह ने कहा कि अपनी नानी की आर्थिक मदद करने के लिए नौ साल की उम्र में चने और गेंहू बेचने शुरू किए। 12 साल की उम्र में वे अपनी नानी के साथ गोइंदवाल चले गए, जहां उनकी मुलाकात तीसरे गुरु, गुरु अमरदास से हुई। उन्होंने गुरु अमरदास को अपना गुरु माना और उनकी सेवा करने लगे। गुरु अमरदास ने गुरु रामदास का विवाह अपनी पुत्री बीबी बानो से कराया। मंत्री मनजीत सिंह सलूजा ने कहा कि गुरु अमरदास ने 1 सितंबर, 1574 को उन्हें गुरुगद्दी सौंपी और उनका नाम गुरु रामदास रखा, जिसका अर्थ है भगवान का सेवक। 1577 में, गुरु रामदास ने अमृत सरोवर नामक एक तालाब के किनारे एक नए शहर की स्थापना की, जो बाद में अमृतसर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने सिख विवाह के लिए आनंद कारज नामक चार फेरों वाली विवाह पद्धति की रचना की, जिससे रूढि़वादी परंपराओं से अलग एक सरल विवाह व्यवस्था बनी। उन्होंने सिख धर्म में गुरु का लंगर की व्यवस्था को आगे बढ़ाया, जहां समुदाय के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। सम्राट अकबर भी गुरु रामदास का सम्मान करते थे और उनके कहने पर पंजाब से एक वर्ष तक लगान नहीं लिया गया था। इस दौरान अध्यक्ष ओंकार सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा, डा.सुरेंद्र कौर वालिया, मंत्री मनजीत सिंह सलूजा, कोषाध्यक्ष परमजीत सिंह छतवाल, मंत्री चरणजीत सिंह डिंपल, जगजीत सिंह बॉबी, गुरमुख सिंह, अवतार सिंह, सतनाम सिंह, गौरव सिंह, गुणवीर सिंह, हरजीत सिंह, सतवंत सिंह, सुरजीत सिंह, राजू सिंधी, कन्हैयालाल चंदानी, पार्षद रमेश गांधी, पूर्व नपाध्यक्ष रजनी साहू, सोनाली, गौरव सिंह, दलजीत सिंह, आदि उपस्थित थे संचालन महामंत्री सुरजीत सिंह सलूजा ने किया।
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