गाजियाबाद

रिहायशी इलाकों में मौत के कारखाने बिना अनुमति चल रही थी फैक्ट्री 

अवैध फैक्ट्री पर प्रशासन मौन, जिम्मेदारी किसकी 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
लोनी गाजियाबाद :  थाना टीला मोड़ क्षेत्र अंतर्गत के  अन्तर्गत पुलिस चौकी तुलसी निकेतन वार्ड नंबर 20, डी-Block, मोहन हलवाई के पीछे वाली गली, कुएं के पास संचालित अवैध पीतल ढलाई फैक्ट्री में रविवार को जोरदार ब्लास्ट हुआ। धमाका इतना तेज था कि आसपास के मकानों में इससे दहशत फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फैक्ट्री में ब्लास्ट होने से हरिओम पुत्र लखमीचंद नामक मजदूर गंभीर रूप से झुलस गया। बताया जा रहा है कि उसके गले में पिघली हुई पीतल फंस गई, जिसके कारण उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। घायल को तत्काल दिल्ली के कैलाश दीप हॉस्पिटल, कड़कड़डूमा में भर्ती कराया गया, जहां उसका ऑपरेशन जारी है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह फैक्ट्री जोगिंद्र नामक व्यक्ति की बताई जा रही है, जो पिछले कई वर्षों से बिना किसी अनुमति के इस क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली पीतल ढलाई का कार्य धड़ल्ले से कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में सैकड़ों अवैध पीतल ढलाई और जींस रंगाई की फैक्ट्रियाँ चल रही हैं, जिनकी शिकायतें बार-बार जिलाधिकारी और प्रदूषण विभाग को दी जा चुकी हैं। लेकिन अवैध धन वसूली के चलते इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन फैक्ट्रियों को प्रदूषण विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण मे चलाया  जा रहा है। कुछ माह पहले ही दो फैक्ट्रियाँ क्षेत्र में सील कर विभाग ने अपने कर्तव्यों की इति श्री कर ली थी लेकिन कथित मिलीभगत के कारण उन्हें  मालिकों ने फिर से चालू कर दिया गया।
अब सवाल यह उठता है कि घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्र में ऐसे खतरनाक उद्योगों को चलाने की अनुमति कौन दे रहा है? क्या इस हादसे के लिए फैक्ट्री संचालक जिम्मेदार है या फिर विभागीय लापरवाही?
इस पूरे मामले की शिकायत अब मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उच्च अधिकारियों से की जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार प्रशासन सख्त कदम उठाता है या फिर अवैध फैक्ट्रियों को एक बार फिर संरक्षण मिल जाएगा ।
अब सवाल यह उठता है कि रिहायशी इलाकों में पीतल ढलाई व जींस रंगाई का कार्य चल रहा है और तुलसी निकेतन पुलिस चौकी को इसकी भनक ना हो। इन अवैध फैक्ट्री के संचालन में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ भी कोई कदम उठाया जाएगा या नहीं,या फिर यह मामला फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्यवाही कर दबा दिया जायेगा।यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है
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