
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। प्राकृतिक और जैविक खेती के नाम पर कृषि विभाग में 87 लाख रुपए से ज्यादा का सरकारी बजट ठिकाने लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। कृषि विभाग की सूची में जिन किसानों को कीटनाशक और रसायन यूरिया से मुक्त प्राकृतिक और जैविक खेती करना दर्शाया गया है। उनमें अधिकांश किसानों के पास जमीन ही नहीं है। कुछ किसानों के पास जमीन एक दो बीघे है भी, तो उन्होंने प्राकृतिक खेती करके फसल नहीं उगाई। ये किसान अभी भी कीटनाशक और रसायनिक खाद से ही परंपरागत खेती करके अपनी जीविका चला रहे हैं। कृषि विभाग के कलस्टरों में इन किसानों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग दी गई है। अब 2650 किसानों का फर्जी आंकड़ा दर्शाकर 87 लाख रुपए को कृषि विभाग के बाबू और अफसर उसे हड़पने की तैयारी में लगे हैं। इसी बजट के बंदरबांट पर नीचे से ऊपर तक बवाल मचा हुआ है।
कृषि विभाग की नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फॉर्मिंग योजना के तहत आंवला और मीरगंज में 2650 किसानों का चयन किया गया था। इसमें मीरगंज में 9 और आंवला में 12 क्लस्टर बनाए गए थे। प्रत्येक क्लस्टर में 125 किसान हैं। एक क्लस्टर में दो महिला किसान है। पुरुष किसानों के खाते में 2000 और महिला किसानों के खाते में 5000 रुपए प्रति कैंडिडेट के हिसाब से प्रोत्साहन राशि भेजी जानी है। महिला किसानों को कृषक सखी कहा जाता है। कृषि विभाग के सूत्रों के मुताबिक विभागीय डेटा में दोनों तहसीलों मीरगंज और आंवला में कुल 2650 एकड़ जमीन में गाय के गोबर और जैविक संसाधनों से खेती करना दर्शाया गया है। जबकि सच्चाई यह है कि किसी भी किसान ने प्राकृतिक खेती नहीं की। न ही कृषि विभाग की सूची में चयनित महिला कृषक सखियों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती की जानकारी ही नहीं है। इस पूरी योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा है। विभागीय अफसर अपने कर्मचारियों से प्राकृतिक खेती के अनुदान में फर्जी भुगतान के बिल स्वीकृत करने का 20% कमीशन एडवांस मांग रहे हैं ।



