सिंगरौली
मझौना रेत खदान में NGT गाइडलाइंस की उड़ रही धज्जियां, प्रशासन मौन
महान नदी का अस्तित्व खतरे में

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जिले के जियावन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मझौना गाँव में अवैध रेत उत्खनन ने गंभीर रूप ले लिया है। जहाँ एक ओर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने रेत खनन के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण के कारण इन नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, सहकार ग्लोबल कंपनी द्वारा संचालित रेत खदान में नदी की गहराई तक मशीनों से रेत निकाली जा रही है। NGT के आदेशों के अनुसार, नदी में यांत्रिक मशीनों से खुदाई करना पूर्णतः प्रतिबंधित है, लेकिन यहाँ जेसीबी और पोकलेन जैसी भारी मशीनों का खुलेआम उपयोग हो रहा है। परिणामस्वरूप, महान नदी की तलहटी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है और उसके प्राकृतिक प्रवाह में परिवर्तन आ गया है।
नदी के मार्ग में बदलाव और पर्यावरण को नुकसान
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने नदी में अस्थायी रास्ते बनाकर रेत निकालने के लिए नदी की धारा को मोड़ दिया है। इससे आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर में कमी आने लगी है और खेती योग्य भूमि पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। देवसर क्षेत्र की प्रमुख सहायक नदी महान अब धीरे-धीरे अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रही है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि खदान से निकलने वाले ओवरलोड ट्रक और डंपर दिन-रात सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे गांव की सड़कों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। धूल और शोर से ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
गांव के कई लोगों ने खनिज विभाग और जिला प्रशासन पर रेत माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अवैध उत्खनन की सूचना कई बार दी गई, लेकिन अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचते या फिर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर लौट जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि “जब तक अधिकारी और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रेत माफियाओं के बीच की सांठगांठ खत्म नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।”
पर्यावरणविदों ने जताई चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह से रेत निकाली जाती रही, तो आने वाले वर्षों में महान नदी का पारिस्थितिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है। नदी की तलहटी से अत्यधिक रेत निकालने से जल संरक्षण की क्षमता घटती है, जिससे सूखे की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन चलने के बावजूद प्रशासनिक तंत्र क्यों मौन है? क्या यह चुप्पी किसी दबाव का परिणाम है, या फिर रेत कारोबारियों से मिलीभगत का?
स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारी तक गुहार लगाई है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो
मझौना की यह रेत खदान केवल एक उदाहरण है। सिंगरौली जिले में कई स्थानों पर इस तरह का अवैध खनन जारी है। यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन, खेती और जल संसाधनों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। जरूरत है कि जिला प्रशासन तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करे और महान नदी को बचाने की ठोस पहल करे — वरना आने वाले समय में यह केवल एक ‘नाम’ बनकर रह जाएगी।




