असम

असम के गोआलपाड़ा जिले के दहिकाटा वन क्षेत्र में विशाल बेदखली अभियान

लगभग 1143 बीघा वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने का लक्ष्य। 

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

असम के गोआलपाड़ा जिले के दहिकाटा आरक्षित वन क्षेत्र में रविवार की सुबह अवैध रूप से कब्जा जमाए लोगों को हटाने के लिए एक बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान की शुरुआत हुई। जिला प्रशासन और असम वन विभाग के इस संयुक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य लगभग 1143 बीघा वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना था। रविवार सुबह ठीक 7 बजे से शुरू हुए इस अभियान में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कुछ दिन पहले ही घोषणा की थी कि यह अभियान 9 और 10 नवंबर को दो दिनों तक चलेगा। उसी के तहत प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ अभियान की शुरुआत की। इस अभियान में 20 से अधिक एक्सकेवेटर मशीनों के साथ पुलिस, अर्धसैनिक बल, वन रक्षक और कमांडो सहित लगभग 900 कर्मियों को लगाया गया। अब तक प्रशासन का लक्ष्य दहिकाटा वन क्षेत्र के भीतर अवैध रूप से बसाए गए लगभग 700 परिवारों को बेदखल करना है। सरकार के अनुसार, पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में व्यापक अतिक्रमण हुआ था, जिसके कारण वन क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अभियान शुरू होने से पहले ही कई परिवारों ने अपने घर स्वयं तोड़ने शुरू कर दिए थे। कई लोगों ने अपने टिन की छत वाले घरों को ढहाकर जरूरी सामान हटाना शुरू कर दिया।जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को पहले ही क्षेत्र खाली करने का निर्देश दिया था, लेकिन कुछ लोगों ने अंतिम समय तक प्रशासन से रोक लगाने की गुहार लगाई। दूसरी ओर, स्थानीय गांवों के निवासियों ने इस बेदखली अभियान को “अमानवीय” बताया। लोगों का आरोप है कि सरकार ने किसी भी प्रकार की पुनर्वास या स्थानांतरण योजना उपलब्ध नहीं कराई है। क्षेत्र के निवासियों ने चिंता व्यक्त की है कि बेदखली के कारण अनेक बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ सकता है और अनेक परिवारों का भविष्य अनिश्चितता में पड़ गया है। सप्ताह की शुरुआत में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने सोशल मीडिया लाइव कार्यक्रम में टिप्पणी की थी कि “कुछ लोग इस अभियान को रोकने की साजिश कर रहे हैं। वे लोग असम को नेपाल जैसा बनाने की कोशिश की थी, लेकिन हम असम को नेपाल नहीं बनने देंगे। बेदखली अभियान रुकेगा नहीं। “वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, दहिकाटा आरक्षित वन क्षेत्र असम वन विभाग की दीर्घकालिक संरक्षण योजना का हिस्सा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को बहाल करना, आरक्षित वन क्षेत्र की सीमाओं को मजबूत करना और अवैध वन कब्जे के खिलाफ सरकार की कठोर नीति को लागू करना है। इसके अलावा, यह अभियान राज्यभर में चल रही अतिक्रमण-विरोधी गतिविधियों का भी हिस्सा है, जो सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि वनभूमि की जैविक समृद्धि को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आने वाले दिनों में असम के विभिन्न आरक्षित वन क्षेत्रों में इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे।

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