असम

1983 दंगा, आयोग की रिपोर्ट अब होगी सार्वजनिक

असम सरकार करेगी विधानसभा में वितरण: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य सरकार 1983 के असम दंगों की जांच करने वाले त्रिभुवन प्रसाद तिवारी आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा सदस्यों के बीच वितरित करेगी। साथ ही रिपोर्ट की प्रतियां असम विधानसभा पुस्तकालय में भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि इसे अध्ययन हेतु सभी सदस्य देख सकें। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि 1983 का वर्ष असम के इतिहास में अत्यंत दुखद और हिंसक रहा। उस दौरान हुई साम्प्रदायिक घटनाओं में 2,000 से अधिक लोग मारे गए थे और लगभग तीन लाख लोग राहत शिविरों में महीनों तक रहने के लिए मजबूर हुए थे। इस त्रासदी की जांच के लिए तत्कालीन सरकार ने न्यायमूर्ति त्रिभुवन प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था, लेकिन आयोग की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि हाल ही में राज्य कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में विधायकों को प्रदान किया जाएगा, ताकि वे 1983 की घटनाओं और उनके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों को गहराई से समझ सकें। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट का सार्वजनिक होना पारदर्शिता और न्याय के एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक होगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “1983 का असम दंगा हमारे इतिहास का एक काला अध्याय था। राज्य सरकार अब इस रिपोर्ट को जनता और विधायकों के लिए सुलभ बनाकर यह संदेश देना चाहती है कि हम अतीत की गलतियों से सीख लेकर भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकेंगे।” ज्ञात हो कि 1983 के दंगों ने असम के सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर डाला था। हजारों परिवार तबाह हुए थे और अब तक कई प्रभावित लोग उस भयावह समय की यादों के साथ जी रहे हैं। सरकार का यह निर्णय उन पीड़ित परिवारों के लिए एक सांत्वना और न्याय की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

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