बरेली

राशनकार्ड फर्जीवाड़ा में छह हजार से अधिक अपात्र ले रहे थे सरकारी खाद्यान्न; 400 पर हुई कार्रवाई

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो 
बरेली। मीरगंज तहसील क्षेत्र में राशनकार्ड फर्जीवाड़ा में गरीबों का राशन ले रहे आखिरकार 400 अपात्रों पर पूर्ति विभाग ने कार्रवाई की है। इन अपात्रों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। जांच में 6500 अपात्रों के नाम सामने आए थे। इसमें अब शेष रह गए लोगों के नाम काटने की तैयारी है। आश्चर्यवाली बात है कि इसमें कोई आईटीआर (इनकम टैक्स रिटर्न) भरता था तो कुछ कार स्वामी। इस तरह मीरगंज और फतेहगंज पश्चिमी से संपन्न लोगों ने फर्जी तरह से राशन कार्ड बनवाकर गरीबों का हक छीन रहे थे।
मीरगंज और फतेहगंज कस्बे से लेकर देहात क्षेत्रों में पूर्ति विभाग ने अपात्रों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले यह प्रक्रिया कस्बों में शुरू हुई। उसके बाद यह प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में भी शुरू हो गई है। इससे अपात्रों में डर है कि उनके नाम काटे जाने के अलावा कहीं कोई अन्य कार्रवाई तो नहीं होगी।
पूर्ति निरीक्षक रवि कुमार ने बताया कि राशन कार्डों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के पास चारपहिया वाहन है या जो आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करते हैं, उनके कार्ड निरस्तीकरण की सूची में हैं। रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी जाएगी, जिसके बाद कार्ड आधिकारिक रूप से कार्ड निरस्त किए जाएंगे। विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई केवल उन परिवारों पर की जा रही है जो पात्रता मानक से अधिक आय वर्ग में आते हैं।
राशन कोटा डीलरों का मोहभंग, पूर्ति व्यवस्था पर असर
सोमवार को डेलपुर गांव के विक्रेता गुलाब सिंह ने भी कोटे की दुकान से त्यागपत्र दे दिया। इससे पूर्व एक अप्रैल को बकैनिया वीरपुर गांव की उचित दर विक्रेता राजकुमारी ने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। डीलरों का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें 90 पैसे प्रति किलो के हिसाब से मेहनताना दिया जाता है, जो बहुत कम है।
मशीन चलाने, मजदूर रखने और वितरण का सारा खर्च उन्हें खुद उठाना पड़ता है। कई डीलरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खाद्यान्न पूरा नहीं मिलता, ऊपर से मशीन चलाने और मजदूरी का खर्च भी हमें उठाना पड़ता है। ऐसे में दुकान चलाना घाटे का सौदा बन गया है, इसलिए कई डीलर खुद ही इस्तीफा दे रहे हैं।
इस्तीफों से अब राशन वितरण व्यवस्था पर संकट के आसार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर डीलर दुकानें छोड़ते गए, तो गरीबों को समय पर अनाज मिलना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि डीलर दुकानें छोड़ते गए और कार्ड भी कट गए, तो अनाज वितरण पूरी तरह ठप हो सकता है।
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