ग्रामीण शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला सैंट आर.वी. कॉन्वेंट स्कूल
बड़ौत राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। देश की राजधानी नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित कार्यक्रम स्थल पर सुखी परिवार फ़ाउंडेशन, गुजरात द्वारा जैन संत डॉ. गणी राजेन्द्र विजय जी महाराज साहेब के पावन सान्निध्य में आयोजित “राष्ट्रीय आदिवासी महिला सम्मेलन 2025” एक प्रेरणादायक और ऐतिहासिक आयोजन साबित हुआ। इस भव्य राष्ट्रीय समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से सामाजिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले संस्थानों को सम्मानित किया गया।
इसी क्रम में सैंट आर.वी. कॉन्वेंट स्कूल, बड़ौत (जिला बागपत) को “Best Educator in Rural Area” (ग्रामीण क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थान) की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल विद्यालय परिवार के लिए, बल्कि संपूर्ण बागपत जनपद के लिए गौरव का विषय बना।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सावित्री ठाकुर, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार रहीं, जिन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षा ही सशक्त भारत का आधार है, और जब ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक आगे बढ़कर उत्कृष्ट कार्य करते हैं तो समाज में एक नई चेतना का संचार होता है।”
इस अवसर पर दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, पूर्वी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्षा सत्य शर्मा तथा भारतीय मानवाधिकार आयोग के महासचिव एवं CEO
भरत लाल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ, जहां विभिन्न राज्यों की आदिवासी महिलाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने पारंपरिक स्वरूप और योगदान को प्रदर्शित किया।
सम्मान ग्रहण करते हुए सैंट आर.वी. कॉन्वेंट स्कूल के प्रतिनिधियों ने कहा—
“यह सम्मान हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। ग्रामीण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने के हमारे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह सराहना हमारे विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।”
विद्यालय प्रबंधन ने सुखी परिवार फ़ाउंडेशन एवं समस्त आयोजकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि वे आगे भी ग्रामीण बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।
यह आयोजन इस संदेश के साथ सम्पन्न हुआ कि जब शिक्षा, संस्कार और समर्पण एक साथ मिलते हैं, तभी समाज में सच्चा परिवर्तन संभव होता है।




