बरेली

अलखनाथ मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट में संदिग्ध लोगों ने रुकवाया काम

महंत कालू गिरी ने डीएम से की कठोर कार्रवाई की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। ऐतिहासिक अलखनाथ मंदिर कॉरिडोर में निर्माण कार्य अचानक रोक दिए जाने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर प्रबंधन ने जिलाधिकारी बरेली को प्रार्थना पत्र देकर गंभीर आरोप लगाए हैं कि कुछ संदिग्ध लोग मंदिर परिसर में घुसकर पर्यटक विभाग द्वारा चल रहे निर्माण को बाधित कर रहे हैं।
मंदिर प्रबंधन का आरोप है कि मुकेश यादव, अपने साथ जमील अहमद सहित 4–5 लोगों को लेकर मंदिर परिसर में घुस आया और दावा किया कि वह हिन्दू युवा वाहिनी का पदाधिकारी है तथा गाटा संख्या 735 व 736/944 की जमीन उसी ने खरीदी है। मौजूद साधु-संतों और भक्तों द्वारा पूछताछ पर उसने निर्माण रुकवाने का प्रयास किया।
मंदिर प्रबंधन का दावा जमीन पर सदियों से मंदिर का ही कब्जा है।
महंत कालू गिरि ने बताया कि यह जमीन आदि-अनादि काल से बाबा अलखनाथ के कब्जे में है। खसरे में भी इस भूमि पर बाबा अलखनाथ की झाड़िया दर्ज हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में हनुमान मंदिर, समाधियाँ, बगीचा, अमरूद–आम के पेड़ और धार्मिक ढांचे मौजूद हैं।
1965 से चल रहा केस: 1970 और 1977 में दो बार खारिज
मंदिर प्रबंधन ने रिकॉर्ड पेश करते हुए बताया वाद संख्या 08-3-65, धारा 180 यूपी टी एक्ट के तहत चुन्ना खां बनाम बाबा दत्त गिरि मुकदमा 17 जनवरी 1970 को खारिज। इसके बाद अपील मंडलायुक्त बरेली में—जो 21 जनवरी 1977 को खारिज। बाद में हाईकोर्ट में दायर याचिका भी वापस ले ली गई। महंतों ने आरोप लगाया कि 2015 में फर्जी तरीके से दाखिल-खारिज कराई गई, जिसे तत्काल निरस्त किया जाना आवश्यक है।
पर्यटक विभाग का निर्माण भी तोड़ा, तनाव बढ़ा
मंदिर वालों ने बताया कि पहले से बनी धर्मशाला व बाबा पवन गिरि का 20×20 का कमरा, जिसे नगर निगम ने बनाया था, पर्यटक विभाग ने तोड़ दिया। अब जब प्रसाद व फूल की दुकान और शौचालय का निर्माण हो रहा था तो इन लोगों ने आकर काम रुकवा दिया।
“मंदिर में मुसलमानों का प्रवेश वर्जित”फिर भी घुस गए लोग
मंदिर गेट पर स्पष्ट लिखा है कि “मुसलमानों का अंदर आना सख्त मना है”, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग जबरन अंदर घुसे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। महंत कालू गिरी व प्रबंधन समिति ने जिलाधिकारी से मांग की है कि सभी दस्तावेजों की तत्काल जांच कराई जाए।साथ ही फर्जी दाखिल-खारिज रद्द की जाए। मंदिर कॉरिडोर में बाधा डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
मांग की है रुकवाया गया निर्माण कार्य फौरन शुरू कराया जाए।
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