झांसी

रानी लक्ष्मीबाई का चरित्र युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत” : अनुराग शर्मा 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति का अनावरण और बुंदेली विरासत दीर्घा का विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में उद्घाटन झांसी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ आयोजन।
झांसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई के जन्मदिवस के अवसर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हिन्दी विभाग परिसर में बुधवार को एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झांसी-ललितपुर के सांसद अनुराग शर्मा ने रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा का अनावरण किया तथा नवनिर्मित बुंदेली विरासत दीर्घा का औपचारिक उद्घाटन भी किया। इस ऐतिहासिक दिन मुख्य अतिथि सांसद अनुराग शर्मा ने कहा रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। रानी लक्ष्मीबाई का चरित्र युवा शक्ति को देशभक्ति और समर्पण का रास्ता दिखाता है। लक्ष्मीबाई को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग अपने पूर्वजों के बलिदान और संस्कार को भूल जाते हैं वो समाज और देश बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हम सबको देशविरोधी जयचंदों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा ऐसी गुलाम मानसिकता वाली देश विरोधी ताकतों से देश की युवा शक्ति ही देश की सुरक्षा दे पायेगी। रानी लक्ष्मीबाई का जीवन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि सदियों तक प्रेरणा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। देश की शिक्षा नीति, संस्कृति और नालंदा विश्वविद्यालय को इन्हीं जयचंदों ने बर्बाद किया।सांसद शर्मा ने बुंदेली विरासत दीर्घा के शुभारंभ पर विश्वविद्यालय को नई उचाईयों पर पहुंचाने की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का प्रशंसनीय प्रयास है। अपनी संस्कृति और पर्यटन स्थलों को संवारने और उन पर गर्व करने के संकल्प को दोहराने याद दिलाने का बुंदेली विरासत दीर्घा काम करेगी और युवाओं में संस्कार देने का काम करेगी। सांसद अनुराग शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वदेशी अपनाने के संकल्प को याद दिलाया और कहा की इस स्वदेशी के मूलमंत्र से देश को विकसित बनाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई अदम्य साहस, राष्ट्रनिष्ठा और नारी और युवा शक्ति की अनूठी प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में रानी की प्रतिमा स्थापित होना युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि लक्ष्मीबाई के जन्मदिवस का वास्तविक सन्देश यही है कि सभी युवा रानी लक्ष्मीबाई की तरह छोटी उम्र में ही बड़ी चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करें। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने सभी युवाओं से आह्वान किया कि उन्हें अपने अंदर राष्ट्रीय चरित्र, राष्ट्रीय समर्पण और राष्ट्रभक्ति जरूर विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा बुंदेलखंड की परंपराओं और संस्कारों को सींचने का काम बुन्देली विरासत दीर्घा करेगी.
कुलपति ने बुंदेली विरासत दीर्घा की स्थापना को क्षेत्रीय संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह दीर्घा विद्यार्थियों के लिए शोध, अध्ययन और सांस्कृतिक समझ का एक जीवंत केंद्र सिद्ध होगी।
उन्होंने कहा कि दीर्घा में बुंदेली लोक संस्कृति, साहित्य, लोककला, इतिहास और धरोहर का दस्तावेजीकरण कर इसे शोध और अध्ययन के लिए उपयोगी बनाया गया है। उन्होंने मुख्य अतिथियों और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा विभागीय विद्यार्थियों के रचनात्मक योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित नाटक, ‘मणिकर्णिका और झलकारी’ मंचित किया, जिसमें रानी की वीरता, संघर्ष और मातृभूमि के लिए उनके बलिदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही चित्रकला, लोकगीत, वाचन और नृत्य सहित विभिन्न कला विधाओं की प्रस्तुतियों ने समूचे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को उपस्थित जनों ने उत्साहपूर्वक सराहा।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने बुंदेली विरासत दीर्घा का अवलोकन किया और इसकी संरचना व सामग्री की सराहना की। दीर्घा में स्थापित दृश्य सामग्री, पांडुलिपियाँ, प्रदर्शन पैनल और बुंदेली संस्कृति पर आधारित संग्रह ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। विश्वविद्यालय परिवार, विद्यार्थी, शिक्षकगण तथा अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह आयोजन रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिवस को समर्पित एक प्रेरणादायक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध अवसर के रूप में यादगार बन गया।
रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिवस पर आयोजित सांस्कृतिक आयोजनों में सर्वप्रथम अभिषेक बबेले और कामद दीक्षित ने बुंदेलखंड की गौरवगाथा बुन्देली में गीत गाकर जोश भर दिया। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण नृत्य संगीतमय नाटक ‘मणिकर्णिका और झलकारी बाई’  की प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। लक्ष्मीबाई की भूमिका में ख़ुशी रावत और झलकारी बाई की भूमिका में पलक एवं अनुराग शर्मा, प्रदीप कुमार, संजना प्रजापति के अभिनय ने सभी को 1857 की संग्राम की याद दिला दी। कुलपति और मुख्य अतिथि ने नाटक में शामिल पूरी टीम को बहुत शाबाशी दी। नाटक की पटकथा-निर्देशन रजनीश का रहा।
इसके साथ बुन्देली नृत्य ‘आज दिन सोने को महाराज’ प्रस्तुत किया गया। रानी के शक्ति अवतरण दिवस पर महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का नृत्य रूप में प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। विश्वविद्यालय की छात्रा चाहत ने एकल नृत्य भाग फिरंगी भाग प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय की छात्रा शिवानी, अफसाना, आकांक्षा, भावना ने राई नृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का समापन कवि सम्मलेन से हुआ, जिसमें बुंदेलखंड और आस-पास से आए कवियों ने वीर रस से ओत प्रोत वाणी में बुन्देली संस्कृति और संस्कारों को अपनी कविता पाठ के माध्यम से प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर ताली बजाने पर मजबूर कर दिया.
कार्यक्रम में  डॉ नीति शास्त्री, डॉ प्रदीप कुमार तिवारी, परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह, कुलानुशासक प्रो आर के सैनी, सहायक कुलसचिव रविन्द्र शर्मा, प्रोफेसर मुन्ना तिवारी, डॉ अचला पाण्डेय, डॉ श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ नवीन चंद पटेल, डॉ बिपिन प्रसाद, डॉ सुनीता वर्मा, डॉ प्रेम लता, डॉ सुधा दीक्षित, डॉ राघवेन्द्र दीक्षित, , डॉ अभिषेक कुमार, डॉ मुहम्मद नईम, लोकभूषण पन्नालाल असर, राजकुमार अंजुम, डॉ सुनीता कपूर, डॉ स्वप्ना सक्सेना, डॉ निधि श्रीवास्तव, अतीत विजय, देवेन्द्र कुमार, डॉ.  द्युति मालिनी, जोगिंदर सिंह, रिचा सेंगर, डॉ. राघवेंद्र द्विवेदी, आशुतोष खुशबू कुशवाहा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पर्वत कुमार और रक्षा पटेल ने किया तथा डॉ नवीन चन्द पटेल ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।
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