बागपत

आचार्य श्री 108 नयन सागर जी महाराज का चातुर्मास बड़ौत में सफलतापूर्वक संपन्न 

आध्यात्मिक ऊर्जा से महका नगर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

बड़ौत/बागपत : चार महीनों तक बड़ौत की पावन धरती पर विराजमान रहे आचार्य श्री 108 नयन सागर जी महाराज के चातुर्मास का आज मंगलमय समापन हुआ। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान का अंत नहीं था, बल्कि बड़ौत के हर घर, हर गली और हर भक्त के हृदय में आध्यात्मिक जागरण का एक नया अध्याय था।

चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, साधना, तप, उपासना और धर्म-अध्ययन के माध्यम से आचार्यश्री ने सभी के जीवन में अहिंसा, संयम, करुणा और सद्भाव के दिव्य संदेशों का प्रसार किया। बड़ौत ने इन चार महीनों में न सिर्फ धर्म को सुना, बल्कि उसे जीने का प्रयास भी किया


मीडिया प्रभारी अनुराग मोहन की महत्वपूर्ण भूमिका

इस चातुर्मास की हर गतिविधि, हर आयोजन और हर संदेश को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मीडिया प्रभारी अनुराग मोहन ने अत्यंत निष्ठा, समर्पण और दक्षता के साथ निभाई।
उनके प्रयासों से चातुर्मास की पूर्णता का संदेश दूर-दूर तक पहुँचा और अधिक से अधिक लोगों को आचार्यश्री के वचनों का लाभ मिला।

समाज के वरिष्ठजनों एवं श्रद्धालुओं ने अनुराग मोहन के कार्य को विशेष रूप से सराहा और कहा कि—
“चातुर्मास की सफलता के पीछे उनका शांत, संयमी और सतत् सहयोग एक मजबूत आधार रहा।”


चातुर्मास का संदेश — आत्मशुद्धि और सामाजिक समरसता

आचार्य श्री 108 नयन सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में

  • अनेक तपस्वियों ने तप किया,
  • घर-घर श्रावक-श्राविकाओं ने नियम लिए,
  • युवाओं ने धर्म-अनुशासन को अपनाया,
  • और बच्चों ने जैन संस्कृति के मूल्यों को समझा।

चार महीनों तक नगर में एक ऐसा वातावरण बना जिसमें क्रोध की जगह संयम,
हिंसा की जगह करुणा,
और चिंता की जगह आत्मविश्वास ने जन्म लिया।

आचार्यश्री ने अपने प्रवचनों में कहा—
“चातुर्मास केवल रुकना नहीं,
जीवन को नई दिशा में ले जाने का अवसर है।”


यथासंभव पूर्णता के साथ हुआ समापन

आयोजकों, व्यवस्थापकों, श्रावक-श्राविकाओं और नगरवासियों के सहयोग से यह चातुर्मास यथासंभव पूर्ण हुआ।
हर आयोजन मर्यादा के साथ, हर कार्य अनुशासन के साथ, और हर दिन पवित्र भावों के साथ संपन्न हुआ।

समापन अवसर पर सभी ने एक ही भावना व्यक्त की—
“आचार्यश्री का बड़ौत में आगमन हमारे लिए सौभाग्य था।
इनका चातुर्मास हमारे जीवन में अमिट छाप छोड़ गया।

यह चातुर्मास बड़ौत के इतिहास में एक शांत, पवित्र और प्रेरणादायक अध्याय बनकर दर्ज हो गया।
आचार्य श्री 108 नयन सागर जी महाराज की कृपा और मार्गदर्शन से
बड़ौत ने धर्म, अनुशासन और आत्मशुद्धि की अनमोल सीखें प्राप्त कीं।

मीडिया प्रभारी अनुराग मोहन तथा पूरी आयोजन टीम को समाज के सभी वर्गों ने हृदयपूर्वक धन्यवाद दिया।

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