झुंझुनू

अभिनेता धर्मेंद्र के निधन पर संजय बुगालिया ने प्रकट की शोक संवेदना 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
झुंझुनूं बुगाला। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में एक रिक्तता दर्ज हो गई।लाखों दिलों की धड़कन और सहज संवेदनाओं के अमर फ़िल्म अभिनेता धर्मेंद्र का निधन होना सिनेमा जगत का एक सितारा अस्त हो गया। इनके निधन पर शिष्य अभिनेता संजय बुगालिया ने गहरा दुख प्रकट किया है।उन्होंने बताया कि धर्मजी के साथ दो बार कार्य करने और उन्हें दो बार निर्देशित करने का सौभाग्य मिला था जो मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
पहली बार जब उनसे मिला तो मन में एक सुपरस्टार से मिलने की स्वाभाविक झिझक थी,परंतु क्षणभर में ही वह दूर हो गई।उनसे मिलने पर ऐसा लगा कि जैसे अपने ही घर के किसी बड़े सदस्य से मिल रहा हूँ। उन्होंने मुझे अपने बच्चों जैसा स्नेह दिया।मेरी पहली फ़िल्म की शूटिंग के दौरान उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। वे दिल्ली में थे और अस्वस्थ महसूस कर रहे थे,लेकिन इसके बावजूद वे समय पर सेट पर पहुंचे और अपना काम पूरी निष्ठा से निभाया। मुझे यह ज्ञात नहीं था कि उन्हें संवाद उर्दू में चाहिए। जब उन्होंने
बताया, तो बड़ी सरलता से बोले कोई बात नहीं। आप मुझे हिंदी में बता दीजिए।फिर उन्होंने स्वयं  संवाद हिंदी में लिखे। यह उनकी लगन,अनुशासन और अद्भुत सरल हृदय का प्रमाण था।
दूसरी बार हमारे साथ काम करते समय तकनीकी कारणों से उनका पूरा फुटेज खराब हो गया तो मैं अत्यंत चिंतित था। जब यह बात उन्हें बताई तो उन्होंने न कोई शिकायत की न कोई प्रश्न किया,बल्कि मुझे अपने फ़ार्महाउस पर आने को कहा और बिना किसी शुल्क के पूरी शूटिंग दोबारा की। ऐसे उदार और महान कर्म केवल एक सच्चे महात्मा,एक असाधारण मनुष्य ही कर सकते हैं। आज इनका दुनिया से जाना गहरी क्षति है। ऐसा लगता है कि परिवार का कोई अपना बिछड़ गया हो। यह हमेशा हमारे दिलों में,एक कलाकार, अद्भुत, सच्चे और महान व्यक्ति के रूप में जीवित रहेंगे।धर्मेंद्र केवल स्क्रीन पर ही नहीं अपितु भारतीय संस्कृति में भी एक स्थायी छाप छोड़ गए हैं।उनकी फिल्में और संवाद आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।उनके निधन से हिंदी सिनेमा का एक अध्याय समाप्त हो गया।धर्मेंद्र जैसे स्टार कभी विदा नहीं होते।वे स्मृतियों में, संवादों में व मुस्कानों में हमेशा जीवित रहेंगे।
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