SDPI प्रतिनिधिमंडल ने पाकुड़ MLA निशात आलम से मुलाकात कर अलीम फाजिल डिग्री की मान्यता बरकरार रखने के लिए विधानसभा में आवाज उठाने का किया अनुरोध
The SDPI delegation met Pakur MLA Nishat Alam and requested him to raise his voice in the Assembly to maintain the recognition of the Alim Fazil degree.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। एसडीपीआई प्रदेश अध्यक्ष सह- जिला परिषद सदस्य मोहम्मद हंजेला शेख के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें प्रदेश उपाध्यक्ष हबीबुर रहमान,प्रदेश महासचिव तहमिदुर रहमान, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य उमर फारूक एवं अधिवक्ता अब्दुल हन्नान शामिल है ने पाकुड़ MLA निशात आलम से उनके आवास में मुलाकात किए। सबसे पहले गठबंधन की सरकार की एक साल पूरा होने पर बधाई दिए तथा मैडम की लंबी उम्र की दुआएं दिए। फिर अलीम फाजिल डिग्री जो क्रमशः स्नातक और स्नातकोत्तर की समकक्ष है की मान्यता बहाल रखने तथा तत्संबंधी विषयों को सदन में उठाने का अनुरोध किया।
मालूम हो कि हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले ने इन डिग्रियों की वैधानिकता और सरकारी क्षेत्र में नौकरी के अवसरों को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। यह निर्णय मुख्य रूप से इन डिग्रियों को यूजीसी के मानकों के अनुरूप न होने के कारण लिया गया है। SDPI की मांग है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई करे: 1. डिग्रियों की मान्यता बहाल करना: उन छात्रों के लिए, जिन्होंने पूर्व में 2023 तक JAC बोर्ड द्वारा संचालित परीक्षाओं के माध्यम से ये डिग्रियाँ प्राप्त की हैं, उनकी मान्यता को सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में बहाल किया जाए। 2. विश्वविद्यालय से संबद्धता: भविष्य में आलिम और फाजिल परीक्षाओं का संचालन किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्ध करके लिया जाए।
3. अलग विश्वविद्यालय की निर्माण : पश्चिम बंगाल की तर्ज पर मदरसा बोर्ड के इन छात्रों के लिए अलग विश्वविद्यालय का निर्माण किया जाए जिसका नाम शेख भिखारी विश्वविद्यालय रखा जाए। 4. मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना: मदरसा शिक्षा को आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली के साथ एकीकृत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि इन डिग्री धारकों को सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने का अवसर मिल सके।
5. मदरसा बोर्ड का गठन: राज्य में एक सक्रिय और पूर्णकालिक मदरसा बोर्ड का गठन किया जाए जो इन शैक्षिक मानकों को सुनिश्चित कर सके।



