गाजियाबाद
जब सब हों एक आकार… तो कैसे रुके भ्रष्टाचार?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी : यमुना नदी का सीना चीरकर लोनी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध रेत खनन अब किसी रहस्य से कम नहीं, बल्कि खुलेआम चलने वाला ऐसा रैकेट बन चुका है जिस पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं दिखता। नियम-कानून, विभागीय मानक और पर्यावरण सुरक्षा—सबकुछ माफिया के बोझिल ट्रकों के नीचे पिसता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर मुद्दे की शिकायतें कई बार संबंधित विभागों को दी गईं, लेकिन न जाने क्यों कार्रवाई हमेशा कागजों तक ही सीमित रह जाती है।
जनप्रतिनिधि भी मौन — जनता पूछ रही सवाल
सबसे अफसोसजनक बात यह है कि क्षेत्र के वही जनप्रतिनिधि, जो चुनावों में जनता हितैषी होने का दावा करते थे, अब इस मामले में मौन साधे हुए हैं।
लोगों का सीधा आरोप है कि उनकी यह चुप्पी संदिग्ध है और कहीं न कहीं यह पूरा खेल अधिकारियों के संरक्षण में ही फल-फूल रहा है।
नियमों की धज्जियाँ, मुनाफे का खेल
खनन स्थल पर नियमों के खिलाफ नदी के बीचों-बीच से रेत निकालने का कार्य बिना किसी रोक-टोक के जारी है। वहीं दूसरी ओर, इस अवैध खनन पर प्रशासन का रवैया अब लोगों के बीच सवालों का बड़ा कारण बना हुआ है।
लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन चाहे तो एक दिन में यह पूरा खेल बंद हो सकता है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा — जिसका मतलब साफ है कि कहीं न कहीं सबकुछ “सेटिंग” पर चल रहा है।
ओवरलोड वाहन — सड़कें टूटीं, व्यवस्था भी
खनन स्थल से निकलकर सड़कों पर दौड़ रही ओवरलोड ट्रकें आम जनता के लिए मुसीबत बनी हुई हैं।
ये वाहन तय सीमा से लगभग दोगुना रेत लेकर दौड़ते हैं, जिससे क्षेत्र में बनी करोड़ों की सड़कों की हालत खस्ताहाल हो चुकी है।
इनसे गिरता रेत यात्रियों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इससे अनजान बनने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं।
किसके संरक्षण में चल रहा यह रैकेट?
किसानों का आरोप है कि रात के समय उनके खेतों में घुसकर जबरन रेत निकाली जाती है। शिकायत करने पर पुलिस उनकी बात सुनने को भी तैयार नहीं होती।
यह स्थिति इस सवाल को और मजबूती देती है कि आखिर यह अवैध खनन किसके संरक्षण में चल रहा है
एनजीटी के आदेश और शासन के नियम — सिर्फ कागजों में कैद
पर्यावरण को होने वाले नुकसान, भूजल स्तर पर पड़ते असर और नदी की प्राकृतिक स्थिति को बिगाड़ने की चिंता शायद अब सिर्फ फाइलों के आखिरी पन्नों तक सीमित रह गई है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट निर्देश और शासन के आदेशों के बावजूद रेत खनन पर रोक न लगना कई बड़े सवाल खड़े करता है सब एक थाली के चट्टे-बट्टे?
क्षेत्र में चल रहे इस अवैध खनन को देखकर यही प्रतीत होता है कि पुलिस, प्रशासन, विभागीय अधिकारी और राजनीतिक संरक्षण—all in one platform पर खड़े हैं।
इस सम्बन्ध में जब खनन अधिकारी गाजियाबाद से बात की गई तो उन्होंने खनन कार्य को सही बताया और खनन कार्य में लगी पोकलेन मशीन के बारे में पूछने पर फोन काट दिया
लोगों का कहना है—
> “जब सब हों मूक दर्शक और सभी की थाली एक ही हो, तो भ्रष्टाचार कैसे बंद होगा?”
अब ज़िम्मेदारी शासन की है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और क्षेत्र व प्रदेश को करोड़ों के राजस्व नुकसान से बचाए।


