
राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जाति जनगणना न कराकर बहुजनों से विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के पास न तो कोई रूपरेखा है, न योजना और न ही जनता से संवाद की इच्छा। केंद्र के जवाब को ‘चौंकाने वाला’ बताते हुए गांधी ने कहा कि सरकार अन्य राज्यों के सफल अनुभवों से भी सीखने को तैयार नहीं है। यह रुख सामाजिक न्याय की राह में बाधा है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को जाति जनगणना के संबंध में संसद में कोई रूपरेखा या चर्चा न होने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बहुजनों के साथ विश्वासघात किया है। राहुल गांधी ने संसद में उनसे पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर साझा किया और आरोप लगाया कि केंद्र जाति जनगणना कराने की कोई इच्छा नहीं रखता है।
गांधी ने पर पोस्ट किया कि संसद में मैंने सरकार से जाति जनगणना के बारे में एक प्रश्न पूछा – उनका जवाब चौंकाने वाला है। कोई ठोस रूपरेखा नहीं, कोई समयबद्ध योजना नहीं, संसद में कोई चर्चा नहीं और जनता से कोई संवाद नहीं। अन्य राज्यों में सफल जाति जनगणना की रणनीतियों से सीखने की भी कोई इच्छा नहीं है। जाति जनगणना पर मोदी सरकार का यह रुख देश के बहुजनों के साथ विश्वासघात है।
राहुल गांधी ने “दशवार्षिक जनगणना की तैयारी के लिए प्रमुख प्रक्रियात्मक चरणों का विवरण और संभावित समय-सीमा, जिसमें प्रश्न तैयार करना और समय-सारिणी शामिल है, के बारे में पूछा है; क्या सरकार जनगणना के प्रश्नों का मसौदा प्रकाशित करने और इन प्रश्नों पर जनता या जनप्रतिनिधियों से सुझाव लेने का प्रस्ताव रखती है; और क्या सरकार विभिन्न राज्यों में किए गए जाति सर्वेक्षणों सहित पिछले अनुभवों पर विचार कर रही है, और यदि हाँ, तो उसका विवरण क्या है?”
जाति जनगणना पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में, केंद्र ने उत्तर दिया कि अगली जनगणना पिछली जनगणनाओं से प्राप्त अनुभवों को ध्यान में रखेगी और संबंधित हितधारकों से सुझाव मांगेगी। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के उत्तर में कहा गया है, “जनगणना का इतिहास 150 वर्षों से अधिक पुराना है। अगली जनगणना पिछली जनगणनाओं से प्राप्त अनुभवों को ध्यान में रखेगी। प्रत्येक जनगणना से पहले, संबंधित हितधारकों से सुझाव भी मांगे जाते हैं।”————-सरकार ने संचार साथी एप के प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता हटाई, कहा-इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही
नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने संचार साथी एप पर बढ़ते विवादों के बीच एप के प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को हटाने का फैसला किया है। दूरसंचार मंत्रालय ने इसकी जानकारी एक्स पोस्ट के जरिए दी है।
विस्तार
संचार साथी एप कर केंद्र सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। सरकार ने फोन में इस एप के प्री-इंस्टॉलेशन को जरूरी नहीं बताया है। दूरसंचार मंत्रालय ने एक्स () पर एक पोस्ट जारी कर इस एप की प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को हटाने की जानकारी दी है।
मंत्रालय ने एक्स पोस्ट में कहा, “सभी नागरिकों को साइबर सुरक्षा का लाभ देने के उद्देश्य से सरकार ने सभी स्मार्टफोन्स में संचार साथी एप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य किया था। यह एप पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मकसद सिर्फ नागरिकों को साइबर दुनिया के अपराधियों से बचाना है… संचार साथी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, सरकार ने मोबाइल निमार्ताओं के लिए अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन को हटाने का फैसला लिया है।
एपल ने जताई थी असहमती
बता दें कि केंद्र सरकार के इस कदम को एपल के फैसले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 28 नवंबर को सरकार से आदेश मिलने के बाद स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एपल (अस्रस्र’ी) ने इसका पालन करने से इंकार कर दिया था। कंपनी ने कहा था कि यह कदम ्रढँङ्मल्ली यूजर्स के निजी डेटा को खतरे में डाल सकता है। एपल ने रॉयटर्स के हवाले से कहा था कि कंपनी अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखेगी।
सरकार ने कहा- जन भागीदारी बढ़ाना था उद्देश्य
मंत्रायल के मुताबिक यह एप “जन भागीदारी” को बढ़ावा देता है, क्योंकि नागरिक किसी भी संदिग्ध आॅनलाइन गतिविधि की रिपोर्ट कर सकते हैं और खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस एप का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है और यदि उपयोगकर्ता चाहें तो वे इसे कभी भी अनइंस्टॉल कर सकते हैं।
एप पर बढ़ रहा था राजनीतिक घमासान
बता दें कि स्मार्टफोन में एप के प्री-इंस्टॉलेशन को 90 दिनों के भीतर अनिवार्य बनाने के आदेश के बाद विपक्ष ने संसद में कड़ा विरोध दर्ज कराया था। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दूरसंचार विभाग के निर्देश पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए इसे तानाशाही करार दिया था। विपक्ष के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार फ्रॉड को रोकने के नाम पर नागरिकों की जासूसी करना चाहती है। वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी आरोप लगाते हुए कहा था कि मोदी सरकार का फोन में संचार सारथी एप इंस्टॉल करने का आदेश लोगों की निजता और आजादी पर खुला हमला है।
हालांकि, विपक्ष के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि ‘संचार साथी’ एप के जरिए जासूसी बिल्कुल भी संभव नहीं है। यह एप लोगों की सुरक्षा और मदद के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस एप से लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने की सरकार की कोई मंशा नहीं है। बता दें नोटिफिकेशन के मुताबिक पहले सरकार ने कहा था कि एप फोन में अनिवार्य होगा और इसे डिलीट नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, विवाद बढ़ने पर दूरसंचार मंत्री ने ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया को बताया था कि जरूरत न होने पर एप को फोन से डिलीट किया जा सकता है।
अब तक 1.4 करोड़ डाउनलोड
सरकार द्वारा एक्स पर जारी बयान के मुताबिक, अब तक 1.4 करोड़ लोग यह एप डाउनलोड कर चुके हैं और रोजाना लगभग 2000 आॅनलाइन फ्रॉड मामलों की जानकारी भेज रहे हैं। बयान में कहा गया, “एप डाउनलोड करने वाले उपयोगकतार्ओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एप को अनिवार्य बनाने का उद्देश्य अधिक से अधिक जागरूकता फैलाना था, ताकि कम तकनीक-जानकार लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। केवल पिछले एक दिन में ही 6 लाख लोगों ने एप डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, जो कि सामान्य से 10 गुना अधिक है। यह दशार्ता है कि लोग अपनी सुरक्षा के लिए इस ऐप पर भरोसा कर रहे हैं।



