सिंगरौली
सेवा प्रदाता एवं सब रजिस्टार की लड़ाई न्यायालय तक पहुंची, परिवाद पत्र दायर
सेवा प्रदाता ने अधिवक्ता सीके सिंह चंदेल के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बैढ़न के यहां दायर कराया परिवाद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । सेवा प्रदाता एवं सब रजिस्टार सिंगरौली की लड़ाई अब न्यायालय तक पहुंच गई है। सब रजिस्टार के कृत्य से परेशान सेवा प्रदाता ने साहस जुटाते हुये अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में परिवाद पत्र दायर किया है। जहां इन दिनों चर्चाओं का बाजार काफी गर्म है। दरअसल सेवा प्रदाता अंकित प्रसाद दुबे पिता इन्द्र प्रसाद दुबे गनियारी-बैढ़न ने अधिवक्ता सीके सिंह चंदेल सिंह के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बैढ़न के यहां परिवाद पत्र दायर करते हुये उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार पर आरोप लगाया है कि वे पिछले 9 वर्षो से लगातार सिंगरौली जिले में पदस्थ हैं। जबकि शासन के स्थानांतरण निती के अनुसार 3 वर्ष से अधिक कोई भी शासकीय सेवक एक ही स्थान पर पदस्थ नही रह सकता। आरोप लगाया है कि उप पंजीयक दस्तावेजो के पंजीयन पर भारी भरकम अधिकारियों के नाम पर वसूलते हैं और विरोध करने वाले सेवा प्रदाताओं के व्यवसाय को चौपट करने की धमकी दी जाती है। साथ ही सार्वजनिक रूप से जलील भी करते हैं और इतना ही नही दस्तावेजो का सही निष्पादन न होने का बहाना बताकर दस्तावेजो को फेंक देते हैं। उन्होंने नपानि खनिज के साथ-साथ स्टेशन हेड महान एनर्जिक लिमि. बंधौरा समेत अन्य संस्थानों में लिखित रूप से इस आशय का आदेश जारी कर दिया कि वे अपने-अपने विभागो के दस्तावेजो का पंजीयन परिवादी के बजाय किसी अन्य सेवा प्रदाताओं से कराएं। जिसपर कुछ संस्थानों ने उन्हें यह लिखकर जवाब दे दिया कि आरोपी ऐसा आदेश देने के लिए अधिकृत नही है। वे अपने-अपने दस्तावेजो का पंजीयन किस सेवा प्रदाता के माध्यम से कराएं और किससे न कराएं यह अपनी व्यवस्था है। इसके बाद उप पंजीयक ने मौखिक रूप से आदेश देने लगे। आगे कहा गया है कि उप पंजीयक परिवादी की छवि धूमिल करने के लिए तरह-तरह के हत्थकण्डे अपना रहा है। इतना ही नही झूठी अफवाहों को फैलाने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहा है। इन्ही कई अन्य मुद्दों को लेकर पहले उप पंजीयक को मियादी नोटिस अधिवक्ता के माध्यम से दी गई थी, लेकिन उसका जवाब नही मिला और अधिवक्ता ने पिछले दिनों न्यायालय में परिवाद पत्र दायर करते हुये अपराध अंतर्गत बीएनएस की धारा 356(2) 356(3) 198, 199, 201 एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 2010 के तहत दायर किया है।



