गाजियाबाद
पवित्र स्थान पर विवादों की राजनीति नहीं चलेगी
समिति गठन की प्रक्रिया में शांति और पारदर्शिता सबसे ज़रूरी
पिछली बैठक में हुए विवाद से सबक लेकर आगे बढ़े समाज
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी : वार्ड 41 स्थित गुलाब वाटिका कॉलोनी के प्राचीन शिव मंदिर की स्थिति इस समय चिंता का विषय बनी हुई है। पूजा, अध्यात्म और सकारात्मकता का प्रतीक यह स्थल अब दो गुटों के विवाद का मैदान बन गया है। जिस स्थान पर श्रद्धा के स्वर गूंजने चाहिए, वहाँ अब राजनीतिक तकरार और व्यक्तिगत अहं की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं।
गली नंबर 7 और 8 के मध्य स्थित इस मंदिर परिसर में 7 दिसंबर को नई प्रबंधन समिति के गठन को लेकर हुई बैठक अचानक तनावपूर्ण माहौल में बदल गई। समिति गठन पर असहमति के चलते दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप, तीखी बहस और अंततः धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि उपस्थित कुछ समझदार व्यक्तियों के हस्तक्षेप से स्थिति बिगड़ने से बच गई।
कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि मंदिर निर्माण और संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय बिना पारदर्शिता के लिए जा रहे हैं। कुछ लोग मंदिर निर्माण में जुटे व्यक्तियों के योगदान को सराहनीय बताते हैं, लेकिन अधिकतर लोग उनकी कार्यशैली से असहमत हैं।
मंदिर के पुजारी तथा प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों के बीच आपसी मतभेद सामने आने के बाद यह विवाद और गहराता गया, जिससे मंदिर की मर्यादा और सामाजिक सौहार्द दोनों प्रभावित हुए।
मंदिर: राजनीति नहीं, आस्था का प्रतीक
मंदिर वह स्थान है जहाँ लोग प्रार्थना, शांति और आस्था के साथ आते हैं — न कि व्यक्तिगत प्रभुत्व या राजनीतिक लाभ के लिए। धार्मिक स्थल पर इस प्रकार की खींचतान न केवल सामाजिक समरसता को तोड़ती है बल्कि भक्तों की आस्था को भी चोट पहुंचाती है।
21 दिसंबर: सुधार और एकजुटता का दिन
7 दिसंबर की बैठक में लिये गए निर्णय के अनुसार 21 दिसंबर को मंदिर की नई प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा। उम्मीद है कि इस बार कॉलोनी के निवासी व्यक्तिगत मतभेद छोड़कर मंदिर के भविष्य और समाज की एकता को प्राथमिकता देंगे।
यह समय है एक ऐसी पारदर्शी, निष्पक्ष और सर्वसम्मति वाली समिति बनाने का जो मंदिर की गरिमा को वापस स्थापित करे और समाज को साथ लेकर चले।


