पाकुड़ में कल्याण विभाग का 12.38 करोड़ का महाघोटाला, एसबीआई अधिकारियों की भूमिका पर भी शक, कई कर्मचारी व लाभुक नामजद
A massive ₹12.38 crore welfare department scam in Pakur, the role of SBI officials is also under suspicion, with several employees and beneficiaries named.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
झारखण्ड के पाकुड़ से एक महाघोटाला/ स्कैम प्रकाश में आया है। दरअसल पाकुड़ जिले के कल्याण विभाग में करोड़ों रुपये राशि का घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। हुआ है। कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का ने नगर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि विभाग के ही कुछ कर्मचारियों ने मिलीभगत कर विभागीय खाता संख्या 11440445629 से 12 करोड़ 38 लाख 66 हजार रुपये की अवैध निकासी की है।
बैंक प्रबंधक की सतर्कता से खुली परतें
8 दिसंबर को एसबीआई बाजार शाखा के प्रबंधक अभिनव कुमार ने पदाधिकारी को फोन कर सूचित किया कि विभाग द्वारा भेजे गए एक एडवाइस/ सूचना/ इंस्ट्रक्शन में किया गया हस्ताक्षर उनके रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा। बैंक पहुंचे विभागीय कर्मचारी अक्षय रविदास का व्यवहार संदिग्ध लगा, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। हस्ताक्षर संदेहास्पद पाए जाने के तुरंत बाद विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट और फिर कार्यालय अधीक्षक मानवेंद्र झा बैंक पहुंचे। बताया गया कि अधीक्षक झा एडवाइस को अपने साथ ले गए और “दूसरा एडवाइस लाने” की बात कहकर वहां से निकल गए। इसी बीच बैंक प्रबंधक लगातार कल्याण पदाधिकारी से संपर्क में थे, जबकि झा ने बैंक कर्मचारियों से कहा कि पदाधिकारी आवास चले गए हैं। इस विरोधाभासी सूचना से बैंक का संदेह और गहरा गया। लगभग 15 घंटे बाद कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार ने स्वीकार किया कि संदिग्ध एडवाइस को उसने फाड़कर नष्ट कर दिया है।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
कल्याण विभाग ने बैंक से 1 फरवरी 2025 से अब तक के लेनदेन का पूरा विवरण मंगाया। विभागीय जांच टीम राकेश रंजन सोरेन, मोहम्मद तहसीन और मोहम्मद ईर्तिका ने खातों की जांच की। जांच में पाया गया कि कई एडवाइस में दर्ज पत्र संख्या, तिथि और निर्गत पंजी आपस में मेल नहीं खाते, जिसके आधार पर 12.38 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हुई। एफआईआर में यह भी दर्ज है कि 1 फरवरी 2025 से पहले, तत्कालीन कल्याण पदाधिकारी लक्ष्मण हरिजन के कार्यकाल में भी इसी प्रकार की संदिग्ध निकासी के संकेत मिले हैं। बैंक द्वारा भेजे गए 74 एडवाइस में से 7 एडवाइस ऐसे पाए गए जिनकी तिथि और पंजी संख्या का मिलान नहीं हुआ।गौरतलब है कि आरोपी अक्षय रविदास को 4 दिसंबर को ही अनुसूचित जनजाति विद्यालय, डुमरचिर में विरमित कर दिया गया था, फिर भी वह 8 दिसंबर को एडवाइस लेकर बैंक पहुंच गया, जिससे साजिश की आशंका और प्रबल हो गई। कल्याण पदाधिकारी ने यह भी कहा है कि एसबीआई अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच आवश्यक है, क्योंकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इतनी बड़ी निकासी बिना बैंक स्तर की सहायता के संभव नहीं लगती।
इन पर दर्ज हुआ मामला
सोची-समझी साजिश के तहत करोड़ों रुपये की अवैध निकासी करने के आरोप में निम्न व्यक्तियों को कांड संख्या 319/25 के अंतर्गत बीएनएस की धारा 316(4), 316(5), 318(4), 336(3), 338, 61(2), 3(5) में नामजद किया गया है—
कार्यालय अधीक्षक: मानवेंद्र झा
कंप्यूटर ऑपरेटर: सूरज कुमार केवट
अनुसेवक: अक्षय रविदास
अन्य खाताधारी/लाभुक/फर्म:
मुकेश कुमार, मिथु कुमार झा, मिंटू कुमार मिश्रा, शिव इंटरप्राइजेज, विप्लव साहा, वीणा देवी, निरंजन कुमार मिश्रा, पूर्णिमा कुमारी, पूजा कुमारी, प्रीतम कुमार झा, प्रदीप कुमार झा, प्रताप रविदास, मनीषा मुर्मू, ज्ञानी देवी, राजेश कुमार दास, संगीता कुमारी, साहा इंटरप्राइजेज, चंदा देवी, अरुण कुमार गुप्ता, अमित कुमार अमर, आदित्य कुमार कश्यप, गौरव कुमार और लालू भास्कर।
जांच जारी
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बैंक एवं विभागीय अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है। फिलहाल पूरे जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और आगामी दिनों में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



