असम

ज़ुबिन गर्ग हत्या केस की सुनवाई शुरू

12 हज़ार पन्नों की चार्जशीट दायर, मंगलवार को पहली पेशी। 

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

असम : प्रसिद्ध गायक ज़ुबिन गर्ग की कथित हत्या से जुड़े मामले में मंगलवार को कामरूप (मेट्रो) के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पहली सुनवाई हुई। सीआईडी ने इस बहुचर्चित केस में सबूतों और दस्तावेज़ों सहित लगभग 12 हज़ार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की है, जिस पर पूरे असम की नज़र टिकी हुई है।सुरक्षा कारणों के चलते केस के सातों आरोपियों को आज व्यक्तिगत रूप से गुवाहाटी की अदालत में पेश नहीं किया गया। सरकारी पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप कोंवर की याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपियों को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअली पेश किया जाए। इस मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल हैं – कार्यक्रम आयोजक श्यामकानु महंत, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, ज़ुबिन के भाई संदिपन गर्ग, ढोल वादक शेखरज्योति गोस्वामी, सह-गायक अमृतप्रभा महंत, और ज़ुबिन गर्ग के दो पीएसओ नंदेश्वर बोरा और परेश वैश्‍य।मंगलवार की सुनवाई में आरोपियों के किसी भी विशेष पक्ष या बयान को दर्ज नहीं किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, न्यायाधीश केवल आरोपियों की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति की समीक्षा करेंगे। अदालत ने सीआईडी को निर्देश दिया है कि सभी आरोपियों को उनके-उनके सुधार गृहों (जेल/सेंट्रल जेल) में ही चार्जशीट की प्रति उपलब्ध कराई जाए। जानकारी के मुताबिक, आज मामले की अगली तारीख तय किए जाने की संभावना है, साथ ही अगली सुनवाई में आरोपियों को अदालत में सशरीर पेश करने के संबंध में भी निर्णय लिया जा सकता है। चार्जशीट में दर्ज जानकारी के अनुसार, आर्थिक गड़बड़ी और पैसों के लेन-देन में कथित हेरफेर को ज़ुबिन गर्ग की हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। आरोप है कि लगभग 4.80 करोड़ रुपये वार्षिक आय वाले गायक ज़ुबिन गर्ग के बैंक खाते में सिर्फ 10 लाख रुपये ही जमा थे। बताया जाता है कि 10 अक्टूबर को ज़ुबिन अपने मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा से इस पूरे हिसाब-किताब की विस्तृत जानकारी लेने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही 19 सितंबर को उन्होंने संदिग्ध परिस्थितियों में दम तोड़ दिया। उधर, गुवाहाटी वकील संघ (बार एसोसिएशन) ने पहले ही यह निर्णय ले रखा है कि वह इस मामले में किसी भी आरोपी की ओर से पैरवी नहीं करेगा। ऐसे में आरोपियों के बचाव के लिए ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सरकारी वकील नियुक्त किए गए हैं। हालांकि, आरोपियों के परिजन अपने स्तर पर निजी अधिवक्ता नियुक्त करने की कोशिश जारी रखे हुए हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button