गाजियाबाद
किसान आंदोलन, लोनी तहसील पर किसानों का उग्र सत्याग्रह
गले में जंजीर, प्रतीकात्मक फांसी का फंदा बनाकर जताया विरोध

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में मंडोला विहार योजना से प्रभावित किसानों का आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 17 दिसंबर को किसानों ने लोनी तहसील पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। विरोध को प्रभावी बनाने के लिए कई किसान गले में जंजीर डालकर धरने पर बैठे, वहीं प्रशासन के रवैये के खिलाफ प्रतीकात्मक फांसी का फंदा भी धरना स्थल पर बनाया गया।
पुलिस ने रोका काफिला, तहसील गेट पर ताला
दोपहर करीब 12 बजे किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के साथ तहसील की ओर बढ़े, लेकिन रास्ते में ही पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। काफी देर तक नोकझोंक के बाद किसानों को आगे बढ़ने दिया गया, मगर तहसील पहुंचते ही मुख्य गेट बंद कर ताला लगा दिया गया। किसानों को परिसर में प्रवेश नहीं मिला, जिससे आक्रोशित किसानों ने गेट पर ही धरना शुरू कर दिया और प्रतीकात्मक रूप से बाहर से ताला भी लगा दिया।
दिनभर चला धरना, अधिकारी रहे नदारद
किसान पूरे दिन तहसील गेट पर डटे रहे, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी बाहर आकर उनकी समस्याएं सुनने नहीं पहुंचा। किसानों का आरोप है कि अधिकारी अंदर कमरों में बैठे रहे और आंदोलनकारी किसानों से दूरी बनाए रखी।
सम्मान की शर्त पर ही वार्ता
शाम करीब 5 बजे उपजिला अधिकारी (एसडीएम) ने किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को कार्यालय में वार्ता के लिए बुलाया। हालांकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक सभी महिला व पुरुष किसानों को सम्मानपूर्वक तहसील परिसर में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक किसी भी प्रकार की बातचीत संभव नहीं है। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल तहसील से बाहर लौट आया।
खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर
प्रशासन किसानों को समझाने के प्रयास करता रहा, लेकिन किसानों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा। इसी कारण किसान रात भी तहसील गेट पर ही खुले आसमान के नीचे बिताने को मजबूर हैं।
महिलाओं की सुविधाओं को लेकर नाराजगी
धरने के दौरान बार-बार महिलाओं के लिए शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई, लेकिन कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा, पर किसानों से दूरी बनाए रखी गई।
आम लोग भी हुए परेशान
धरने का असर आम नागरिकों पर भी दिखा। तहसील में अपने निजी कार्यों से आए लोगों को अधिकारियों से मिलने नहीं दिया गया, जिससे दिनभर सरकारी कामकाज प्रभावित रहा।
प्रशासन के रवैये पर उठे सवाल
किसानों ने सवाल उठाया कि जब आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, तो अधिकारी बाहर आकर संवाद करने के बजाय कमरों में बैठे रहना क्यों जरूरी समझ रहे हैं। साथ ही पत्रकारों से भी प्रशासन ने दूरी बनाए रखी, जिससे स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान मौजूद
इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश संगठन मंत्री प्रवीण कुमार, सुनील बालियान, मास्टर महेंद्र सिंह त्यागी, टिकैत टीम से बिल्लू प्रधान, नीरज त्यागी, राजबीर त्यागी, टीनू चौधरी, बालक राम त्यागी, शहजाद चौधरी, बॉबी त्यागी, शाहरुख, मोमिन, राकेश कुमार, रामनरेश, सलीम, गौरव त्यागी, मनवीर प्रधान, रणवीर बैसला, पुरुषोत्तम त्यागी सहित सैकड़ों महिला व पुरुष किसान मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, मंडोला विहार योजना से प्रभावित किसानों का यह आंदोलन प्रशासन और किसानों के बीच संवाद की गहरी कमी को उजागर करता है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन के और उग्र होने की आशंका जताई जा रही है।



