बरेली

बाढ़ की संभावनाओं को देख रामगंगा क्षेत्र में बनाया फ्लड प्लेन एरिया

एरिया का सीमांकन नेशनल इंस्टीट्यूट हाइड्रोलॉजी रुड़की ने किया

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। रामगंगा नदी में अगले 25 साल तक बाढ़ आने की संभावनाओं को देखते हुए फ्लड प्लेन एरिया का सीमांकन नेशनल इंस्टीट्यूट हाइड्रोलॉजी रुड़की ने किया है। इसमें शामिल 160 गांवों में करीब सौ मीटर तक निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की तैयारी है। फ्लड प्लेन एरिया की फाइनल रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद जिला पर्यावरण समिति अंतिम मुहर लगाएगी। सीमांकन की प्रारंभिक रिपोर्ट में जो गांव शामिल किए गए हैं, उन गांवों में फाइनल रिपोर्ट में कुछ बदलाव भी हो सकता है।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार लांबा ने 26 नवंबर को डीएम की अध्यक्षता में हुई जिला पर्यावरण समिति की बैठक के जारी मिनट्स के अनुपालन में डीएम और डीएफओ को रिपोर्ट भेजकर फ्लड प्लेन एरिया का निर्धारण एवं नदियों के ई-फ्लो मेनटेन करने के संबंध अवगत कराया। बताया है कि रामगंगा नदी में 25 वर्ष के अंतर्गत अधिकतम फ्लड प्लेन एरिया को कमेटी द्वारा निर्धारित किया जाना है। फ्लड प्लेन एरिया से 100 मीटर की दूरी तक निर्माण कार्यों को प्रतिबंधित करने का निर्णय भी कमेटी करेगी। लगभग 75 किलोमीटर लम्बाई में रामगंगा नदी बहती है। फ्लड प्लेन एरिया के निर्धारण के बारे में बताया है कि बरेली खंड में वर्ष 2006 से पूर्व के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
वर्ष 2010 की बाढ़ के आकड़ों के आधार पर फ्लड प्लेन एरिया का निर्धारण किया गया है। नो कंस्ट्रक्शन जोन का चन्हांकन जनपद बिजनौर से कन्नौज तक किया जाना है। अभियंता ने रिपोर्ट में बताया है कि गंगा नदी पर नो डेवलपमेंट जोन और नो कंस्ट्रक्शन जोन का निर्धारण केन्द्रीय जल आयोग नई दिल्ली ने किया है। उनके स्तर से उपलब्ध कराए गये अक्षांश व देशांतर पर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग पिलर लगवा रहा है। केन्द्रीय जल आयोग से गठित विशेष समिति की 5वीं बैठक के जारी हुए कार्यवृत्त में केन्द्रीय जल आयोग ने नो डेवलपमेंट जोन व नो कंस्ट्रक्शन जोन का निर्धारण करने के लिए सेटेलाइट डाटा का उपयोग किया है।
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