बरेली

एसआरएमएस रिद्धिमा में नाटक बियॉन्ड द डेथ का मंचन 

बदला लेने के लिए आत्मा ने मांगा शरीर

   नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार को नाटक बियॉन्ड द डेथ का मंचन हुआ। डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह लिखित और डॉ. प्रभाकर गुप्ता एवं अश्वनी कुमार द्वारा नाट्य रूपांतरित नाटक का  निर्देशन विनायक कुमार श्रीवास्तव ने किया। नाटक एक सड़क दुर्घटना से आरंभ होता है जिसमें तीन लोगों की मृत्यु हो जाती है। अगले दृश्य में एक लड़का हार्दिक और उसकी मां बात करते दिखते हैं, तभी फोन की घंटी बजती है। उधर से बोलने वाला खुद को हार्दिक से उसका दोस्त अस्तित्व बताता है और उसे होटल यूटोपियन लक्स में टेबल नंबर दस पर बुलाता है। हार्दिक उससे मिलने जाता है और टेबल नंबर पर एक आदमी को देखता है जो अस्तित्व नहीं है, लेकिन वह आदमी हार्दिक को पहचानने को कहता है। हार्दिक के इनकार पर वह खुद को अस्तित्व ही बताता है। कहता है कि एक सड़क दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गयी थी और वह इसी होटल में आये हुए किसी व्यक्ति के शरीर में  प्रवेश कर हार्दिक से बात करने की बात कहता है। ऐसा सुन हार्दिक को डरता देख वह न डरने की बात कह मदद करने को कहता है। हार्दिक के सवाल किस तरह साथ देना है पर वह मर कर मेरा साथ देने को कहता है। यह सुन हार्दिक घबरा जाता है और थोड़ा समय मांगता है। अस्तित्व उसे समय देता है। उसी समय होटल में रखी एक मूर्ति अचानक खड़ी होती है और अस्तित्व की आत्मा को खींच लेती है। वो व्यक्ति जिसके शरीर में अस्तित्व था, वो होश में आ जाता है और हार्दिक से पूछता वो कौन है और यहां कैसे आया। अगले दृश्य में हार्दिक अपने घर में परेशान दिखता है। तभी फोन की घंटी बजती है और दूसरी तरफ से आवाज खुद को  अस्तित्व बता कर हार्दिक को फिर है होटल यूटोपियन लक्स में बुलाती है। हार्दिक फिर होटल में अस्तित्व से मिलता है, जो किसी और व्यक्ति के शरीर में प्रवेश किए हुए है। वो भी उसे बहुत डरता है, लेकिन वह हार्दिक से कहता कि अब वो उसे नहीं मारेगा क्योंकि वो उसका दोस्त है। हार्दिक खुश होकर घर चला जाता है। घर पर फिर अस्तित्व का फोन आता है। वो उसे फिर होटल बुलाता है। अब अस्तित्व किसी और के शरीर में मिलता है। अस्तित्व हार्दिक से उसका शरीर उधार मांगता है। कहता है कि गरिमा हार्दिक से प्यार करती है इसलिए वो हार्दिक के शरीर में आकर गरिमा से बात करना चाहता है। हार्दिक तैयार हो जाता है। अब अस्तित्व कभी भी किसी के शरीर में आकर हार्दिक को परेशान करने लगता है। एक दिन परेशान हो कर हार्दिक अस्तित्व की बात मानने से मना कर देता है। इससे अस्तित्व नाराज हो जाता है। हार्दिक और गरिमा की शादी हो जाती है। कुछ दिन तो दोनों का रिश्ता बहुत अच्छा चलता है, लेकिन अस्तित्व की आत्मा हार्दिक के शरीर में प्रवेश कर जाती है और वो हार्दिक के शरीर में रह कर गरिमा को परेशान करती है। इससे परेशान गरिमा मनो चिकित्सक डॉ. नलिनी से  हार्दिक की काउंसलिंग करवाती है। कोई फायदा नहीं होने पर वह एक तांत्रिक से संपर्क करती है। तांत्रिक हार्दिक के शरीर से अस्तित्व की आत्मा निकाल कर बोतल में बंद करके अपने आश्रम में जाता है। लेकिन कुछ दिन बाद तांत्रिक के मरने पर बोतल में से अस्तित्व की आत्मा बाहर आकर फिर हार्दिक के अंदर प्रवेश कर जाती है। नाटक में गौरव कार्की (हार्दिक), सोनालिका सक्सेना (मम्मी), अंशिका सिंह (रिसेप्शनिस्ट), मानेश यादव (अनजान व्यक्ति 1), सोहम (अनजान व्यक्ति 2),  प्रियांश (अनजान व्यक्ति 3), हर्ष यादव (अनजान व्यक्ति 4),  चम्पा उपाध्याय (गरिमा), ऋषिता सिंह (डॉ. नलिन), शिवम यादव (तांत्रिक), हिमांशु (मूर्ति 1), विष्णु यादव (मूर्ति 2), आद्या सिंह (भूत 1), रागिनी सिंह (भूत 2) ने अपनी- अपनी भूमिकाओं में बेहतरीन अभिनय किया। नाटक में संगीत सूर्यकान्त चौधरी ने दिया। उन्होंने पवन भरद्वाज के साथ गायन की जिम्मेदारी संभालने के साथ वायलिन वादन भी किया। गायक ऋषभ पाठक (पखावज और तबला) और अनुग्रह सिंह (की-बोर्ड) ने अपने वाद्ययंत्रों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नाटक में कोरियोग्राफी अंशु शर्मा, साउंड संचालन अरुण गंगवार और जफर, संगीत संचालन शिवा शर्मा और प्रकाश का संचालन जसवंत सिंह ने किया। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चैयरमेन देव मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, आदित्य मूर्ति जी, ऋचा मूर्ति जी, देविशा मूर्ति जी, देवांश मूर्ति जी, उषा गुप्ता, सुभाष मेहरा, डा. जसप्रीत कौर, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. शैलेश सक्सेना, डा. आशीष कुमार, डा. रीता शर्मा मौजूद रहे।
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